Makka Ki Kheti: देश में मक्का की खेती को ज्यादा फायदे का सौदा बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने बड़ी पहल की है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR) में वैज्ञानिक मनीष ककरलिया ने किसान इंडिया को बताया कि मक्का संस्थान ने इस साल 50 से अधिक नई और उन्नत मक्का किस्में तैयार की हैं. ये किस्में न सिर्फ ज्यादा उत्पादन देती हैं, बल्कि इनकी क्वालिटी भी बेहतर होता है और ये कीट व बीमारियों के प्रति ज्यादा सहनशील हैं. इससे किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
उन्नत किस्मों की खासियत क्या है?
वैज्ञानिक मनीष ककरलिया ने बताया कि, नई विकसित मक्का किस्मों को इस तरह तैयार किया गया है कि किसान कम लागत में इससे ज्यादा उत्पादन ले सकें. इन किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक है, जिससे फसल खराब होने का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा, इनकी ग्रोथ तेजी से होती है और दाने की क्वालिटी भी बेहतर रहती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
खरीफ सीजन के लिए बेहतरीन विकल्प
वैज्ञानिक मनीष ककरलिया के अनुसार, कई हाइब्रिड किस्में खरीफ सीजन के लिए बेहद उपयुक्त हैं. इनमें IMH 231, 224 और 221 जैसी किस्में शामिल हैं, जो खरीफ सीजन में भी अच्छी पैदावार दे सकती हैं. किसान इन किस्मों को अपनाकर अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई और खेत की तैयारी भी जरूरी है.
| किस्म का नाम | साल | उपज (टन/हेक्टेयर) | अवधि | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|---|---|
| आईएमएच 231 | 2024 | 7.00 | मीडियम टर्म | फॉल आर्मीवर्म, टरसीकम व मीडिस पत्ती झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी |
| आईएमएच 224 | 2022 | 7.23 | मीडियम टर्म | तना छेदक, फॉल आर्मीवर्म, टरसीकम व मीडिस पत्ती झुलसा के प्रति प्रतिरोधी |
| आईएमएच 221 | 2022 | 7.50 | शॉर्ट टर्म | तना छेदक व पत्ती झुलसा रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी, चारकोल सड़न के प्रति सहनशील |
| डीएमआरएच 1305 | 2018 | 6.50 | शॉर्ट टर्म | पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त |
मक्का साइलेज: पशुपालन के लिए वरदान
मक्का का इस्तेमाल सिर्फ अनाज के रूप में ही नहीं, बल्कि पशुओं के चारे (साइलेज) के रूप में भी किया जाता है. साइलेज बनाने से पशुओं को सालभर पोषक आहार मिलता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं.
पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए साइलेज मक्का भी बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है. साइलेज किस्म आईएमएच 229 से प्रति एकड़ लगभग 220 से 222 क्विंटल तक हरा चारा उत्पादन संभव है. यह किस्म खासतौर पर डेयरी किसानों के लिए उपयोगी है, क्योंकि इससे उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज तैयार किया जा सकता है. सही तरीके से तैयार किया गया साइलेज लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आधुनिक मशीनों और तकनीकों का उपयोग भी किया जा रहा है, जिससे किसानों को सुविधा मिलती है.
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन
वैज्ञानिक मनीष ककरलिया ने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई तकनीकों को भी अपनाएं. जैसे कि न्यूमैटिक प्लांटर मशीन से बुवाई करने पर बीज की बचत होती है और पौधों की दूरी सही रहती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है. इसके अलावा, समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण और कीटनाशकों का सही उपयोग भी जरूरी है.

मक्का की उन्नत किस्मों के नाम और खासियत
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
इन नई किस्मों और तकनीकों के जरिए मक्का की खेती को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सकता है. अगर किसान सही जानकारी और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो वे कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि देश में कृषि क्षेत्र भी मजबूत होगा. मक्का की नई उन्नत किस्में किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई हैं. बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन के साथ किसान अपनी पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ा सकते हैं. आने वाले समय में मक्का खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.