Dairy Farming Tips: गर्मी का कहर अब तेज होता जा रहा है और इसका सीधा असर पशुपालकों की आय पर पड़ने लगा है. लू और बढ़ते तापमान के कारण दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन 10 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए, तो यह नुकसान और भी बढ़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि पशुपालक गर्मी के इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें.
हीट स्ट्रेस क्या है और कैसे पहचानें?
अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिसे हीट स्ट्रेस कहा जाता है. इस स्थिति में जानवर हांफने लगते हैं, बेचैन रहते हैं और उनका चारा खाने का मन भी कम हो जाता है.
इसके अलावा कुछ गंभीर लक्षण भी दिख सकते हैं:
- दिल की धड़कन तेज होना
- शरीर में तनाव बढ़ना
- दूध उत्पादन में गिरावट
- प्रजनन क्षमता पर असर
विदेशी और संकर नस्ल की गायों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.
चराई का सही समय और ठंडी पशुशाला जरूरी
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मी के मौसम में पशुओं को दोपहर की तेज धूप से बचाना बेहद जरूरी है. सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक उन्हें बाहर चराने के लिए बिल्कुल न ले जाएं. इसके साथ ही पशुशाला को ठंडा और हवादार बनाना भी उतना ही जरूरी है. इसके लिए छत पर सफेद पेंट करवाएं या घास-फूस का छप्पर डालें, पंखे, कूलर या फॉगर्स का इस्तेमाल करें और पशुओं को हमेशा छायादार जगह पर रखें.
पानी की कमी न होने दें
गर्मी में पानी सबसे अहम भूमिका निभाता है. एक दुधारू पशु को रोजाना करीब 60 से 80 लीटर पानी की जरूरत होती है.
ध्यान रखें:
- दिन में 3-4 बार साफ और ठंडा पानी जरूर पिलाएं
- पानी के बर्तन (खुरली/नांद) को रोज साफ करें
- गंदा पानी देने से बीमारियों का खतरा बढ़ता है
पानी की सही मात्रा से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी बना रहता है.
संतुलित आहार से बढ़ाएं दूध उत्पादन
गर्मी में पशुओं का खान-पान सही रखना बहुत जरूरी है. उनके आहार में पोषक तत्वों का संतुलन होना चाहिए. पशु को हरा चारा, सूखा चारा और दाना सही मात्रा में दें. साथ ही चारे को काटकर या कुट्टी बनाकर खिलाएं, जिससे पाचन आसान हो.
घर पर बनाएं पौष्टिक दाना
आप घर पर ही 100 किलो संतुलित पशु आहार तैयार कर सकते हैं:
- 31 किलो अनाज
- 33 किलो खली
- 33 किलो चोकर
- 2 किलो मिनरल मिक्सचर
- 1 किलो नमक
इन सभी को मिलाकर तैयार किया गया दाना दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.
बीमारियों और कीटों से बचाव भी जरूरी
गर्मी में मच्छर और मक्खियां ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए पशुओं को साफ-सुथरे वातावरण में रखें, समय-समय पर डीवॉर्मिंग (पेट के कीड़े की दवा) दें और नियमित टीकाकरण करवाएं. जरूरत पड़ने पर पशुओं को इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन C व E भी दिए जा सकते हैं. अगर किसी पशु में हीट स्ट्रेस के गंभीर लक्षण दिखाई दें, जैसे लगातार हांफना, खाना छोड़ देना या अत्यधिक कमजोरी, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.