Haryana News: गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए हरियाणा सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है. धान-गेहूं की जगह दलहन और मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी बीच कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल विविधीकरण के तहत प्रदेश में ढैंचा, दलहन और ग्वार की खेती का रकबा बढ़ाने का टारगेट सेट किया है. उसने फसल वर्ष 2026 के लिए 4.50 लाख एकड़ जमीन पर ढैंचा, दाल और ग्वार की खेती का लक्ष्य तय किया है. खास बात यह है कि इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ आर्थिक मदद दी जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से राज्य में दलहन का रकबा बढ़ेगा और किसान धान-गेहूं फसलों की खेती से दूरी बनाएंगे.
दरअसल, फसल विविधीकरण योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चलाए जा रहे कार्यक्रम का हिस्सा है. इस योजना का उदेश्य पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है. इसके तहत ढैंचा के साथ-साथ समर मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन और ग्वार की खेती को बढ़ाया जाएगा. खास बात यह है कि इन फसलों की खेती करने पर किसानों की कमाई बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी.
‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा
किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग इन फसलों की खेती करने पर 1,000 प्रति एकड़ की सहायता देगा, जो खेतों के सत्यापन के बाद सीधे डीबीटी के जरिए खातों में भेजी जाएगी. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा. किसान बाजार से बीज खरीदकर बोई गई फसल की फोटो पोर्टल पर अपलोड करेंगे. रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल तक खुले रहेंगे, जबकि 16 अप्रैल से 15 मई के बीच अधिकारियों द्वारा खेतों का सत्यापन किया जाएगा, क्योंकि इन फसलों का चक्र लगभग 45 दिनों का होता है.
हरियाणा में सबसे ज्यादा लक्ष्य वाले टॉप 9 जिले
| रैंक | जिला | लक्ष्य (एकड़) |
|---|---|---|
| 1 | सिरसा | 50,000 |
| 2 | फतेहाबाद | 38,000 |
| 3 | करनाल | 37,000 |
| 5 | जींद | 35,000 |
| 6 | हिसार | 30,000 |
| 7 | कुरुक्षेत्र | 30,000 |
| 8 | यमुनानगर | 25,000 |
| 9 | पलवल | 25,000 |
हरियाणा में फसल विविधीकरण योजना के तहत जिलों को अलग-अलग लक्ष्य दिए गए हैं. सबसे ज्यादा 50,000 एकड़ का लक्ष्य सिरसा को मिला है. इसके बाद फतेहाबाद को 38,000 एकड़, करनाल को 37,000 एकड़ और जींद को 35,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है. हिसार और कुरुक्षेत्र को 30,000-30,000 एकड़, जबकि यमुनानगर, पलवल और कैथल को 25,000-25,000 एकड़ का लक्ष्य मिला है.
किन जिलों को मिला कितना टारगेट
वहीं भिवानी, पानीपत और रोहतक को 20,000-20,000 एकड़, सोनीपत को 18,000 एकड़ और रेवाड़ी को 15,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है. झज्जर और मेवात को 11,000-11,000 एकड़, अंबाला और चरखी दादरी को 10,000-10,000 एकड़, गुरुग्राम को 8,000 एकड़, पंचकूला को 5,000 एकड़ और फरीदाबाद व महेंद्रगढ़ को 3,500-3,500 एकड़ का लक्ष्य तय किया गया है.
अंबाला को 10,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है
अंबाला के उप निदेशक कृषि डॉ. जसविंदर सिंह ने मीडिया से कहा कि सरकार किसानों को हरी खाद (ग्रीन मैन्योर) अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है. इस फसल को बाद में खेत में ही जोत दिया जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है. उन्होंने कहा कि अंबाला को 10,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है और इसे पूरा करने के लिए किसान लगातार जागरूक किए जा रहे हैं, ताकि अगली फसलों की पैदावार भी बेहतर हो सके.