यूपी में 15 अप्रैल से भूसा-साइलेज खरीद शुरू, योगी सरकार ने चारे की कमी दूर करने को तेज किए इंतजाम

इस पूरी पहल की सबसे खास बात यह है कि सरकार किसानों से सीधे भूसा खरीदने को बढ़ावा दे रही है. इससे दोहरा फायदा होगा. एक तरफ गोआश्रय स्थलों को समय पर चारा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 2 Apr, 2026 | 08:45 AM

Uttar Pradesh fodder supply: उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है. खासतौर पर गर्मी के मौसम को देखते हुए गोआश्रय स्थलों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं. इसी दिशा में भूसा और साइलेज की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. सरकार का साफ कहना है कि किसी भी हालत में प्रदेश के गोआश्रय स्थलों पर चारे की कमी नहीं होनी चाहिए.

सरकार की सख्ती से आई तेजी

राज्य सरकार के निर्देशों के बाद जिलों में टेंडर प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है. अधिकारियों के अनुसार कई जिलों में यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि 6 जिलों में साइलेज से जुड़े टेंडर पूरी तरह पूरे भी कर लिए गए हैं. जिन जिलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां जल्द ही चारे की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी.

बाकी जिलों में भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार की सख्ती का असर साफ दिख रहा है, क्योंकि इस बार टेंडर में देरी जैसी समस्या सामने नहीं आ रही है.

गोआश्रय स्थलों में चारे की कमी नहीं होने देने पर जोर

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी गोआश्रय स्थल पर भूसा और साइलेज की कमी नहीं होनी चाहिए. खासकर गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए चारे की जरूरत बढ़ जाती है, इसलिए पहले से भंडारण सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पूरी प्रक्रिया की निगरानी शासन स्तर से की जा रही है, ताकि काम में पारदर्शिता बनी रहे और समय पर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें.

15 अप्रैल से शुरू होगा विशेष अभियान

सरकार ने 15 अप्रैल से एक विशेष भूसा संग्रह अभियान शुरू करने का फैसला भी लिया है. इस अभियान के तहत भूसा दान के साथ-साथ खरीद के जरिए भी इकट्ठा किया जाएगा. इसका उद्देश्य यह है कि गोआश्रय स्थलों में लंबे समय तक पर्याप्त चारा उपलब्ध रह सके.

इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण योजना पर काम किया जा रहा है, जिसमें हर गोआश्रय स्थल के आसपास 4 किलोमीटर के दायरे में गोचर भूमि को जोड़ा जाएगा. इससे स्थानीय स्तर पर चारा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में चारे की कमी की समस्या कम होगी.

किसानों से सीधी खरीद, दोहरा फायदा

इस पूरी पहल की सबसे खास बात यह है कि सरकार किसानों से सीधे भूसा खरीदने को बढ़ावा दे रही है. इससे दोहरा फायदा होगा. एक तरफ गोआश्रय स्थलों को समय पर चारा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा.

यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और स्थानीय बाजार को भी फायदा मिलेगा.

गुणवत्ता पर भी खास ध्यान

सरकार सिर्फ मात्रा पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान दे रही है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भूसा और साइलेज की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो चारा पशुओं को दिया जा रहा है, वह सुरक्षित और पौष्टिक हो. इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी.

बेहतर व्यवस्थाओं की उम्मीद

योगी आदित्यनाथ सरकार के इस सक्रिय और सख्त रुख से प्रदेश के गोआश्रय स्थलों की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. समय पर चारा उपलब्ध होने से न केवल पशुओं की देखभाल बेहतर होगी, बल्कि किसानों को भी आर्थिक रूप से लाभ मिलेगा.

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