धान की रिकॉर्ड पैदावार ने बढ़ाई टेंशन! पंजाब के गोदाम फुल, 1 अक्टूबर से शुरू होगी नई आवक

Punjab Paddy Production: पंजाब में इस खरीफ सीजन धान की रिकॉर्ड पैदावार का अनुमान है, लेकिन राज्य के गोदाम पहले से ही क्षमता से ज्यादा भरे हुए हैं. 1 अक्टूबर से धान की आवक शुरू होने से पहले पुराने अनाज के उठाव की जरूरत है, वरना किसानों और प्रशासन के सामने भंडारण की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Aug, 2026 | 09:47 AM

Paddy Procurement Punjab: पंजाब में इस खरीफ सीजन धान की बंपर पैदावार होने का अनुमान है. किसानों के लिए यह अच्छी खबर है, लेकिन सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. राज्य के गोदाम पहले से ही अनाज से भरे पड़े हैं और अब नई फसल को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है. अगर समय रहते पुराने स्टॉक को दूसरे राज्यों में नहीं भेजा गया, तो धान की खरीद शुरू होने के बाद भंडारण की समस्या और गंभीर हो सकती है.

क्षमता से कहीं ज्यादा अनाज गोदामों में मौजूद

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में अनाज रखने की कुल भंडारण क्षमता करीब 180 लाख टन है. इसके मुकाबले फिलहाल राज्य में करीब 271 लाख टन अनाज का स्टॉक मौजूद है. इसमें पिछले तीन सीजन का लगभग 155 लाख टन चावल और 116 लाख टन गेहूं शामिल है. स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकारी गोदामों में लगभग पूरी क्षमता तक अनाज भरा हुआ है. अब अतिरिक्त अनाज रखने के लिए राइस मिलों और अनाज मंडियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, नई फसल के लिए जगह तभी बन पाएगी, जब मौजूदा चावल और गेहूं का उठाव तेजी से किया जाए.

इस बार रिकॉर्ड रकबे में हुई धान की खेती

पंजाब में इस साल धान की खेती का रकबा भी काफी बढ़ा है. करीब 32.76 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 80 लाख एकड़ में धान बोया गया है. राज्य सरकार ने इस सीजन में करीब 180 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है. धान के बढ़ते रकबे की एक बड़ी वजह इसका बेहतर MSP भी है. पिछले कुछ सालों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में लगातार बढ़ोतरी हुई है. साल 2022 में धान का MSP 2,060 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 2,461 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. इससे किसानों का धान की खेती की ओर रुझान बना हुआ है.

भूजल और भंडारण दोनों पर बढ़ी चिंता

कृषि विशेषज्ञों के सामने सिर्फ भंडारण की समस्या नहीं है. पंजाब में धान की ज्यादा खेती का असर भूजल पर भी पड़ रहा है. धान को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जिसके कारण कई इलाकों में भूजल स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों ने राज्य में धान का रकबा करीब 30 प्रतिशत तक कम करने की सलाह दी है. उनका मानना है कि फसल विविधीकरण से पानी की बचत के साथ-साथ भंडारण और खरीद व्यवस्था पर भी दबाव कम किया जा सकता है.

केंद्र से अनाज उठाने की मांग

राज्य सरकार लगातार केंद्र से पुराने अनाज का जल्द से जल्द उठाव करने की मांग कर रही है. पंजाब सरकार के अनुसार, केंद्र 20 सितंबर तक करीब 18 लाख टन अनाज उठाने पर सहमत हुआ है. हालांकि, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि अभी तक अनाज की आवाजाही शुरू नहीं हुई है. सरकार के सामने अब समय की भी कमी है. 1 अक्टूबर से मंडियों में धान की आवक शुरू होने वाली है. ऐसे में अगर उससे पहले गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं बनाई गई, तो खरीद और भंडारण दोनों व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है.

किसानों से लेकर प्रशासन तक बढ़ सकती है परेशानी

धान की अच्छी पैदावार किसानों के लिए आम तौर पर राहत की खबर होती है, लेकिन इस बार भंडारण संकट इसकी राह में बड़ी चुनौती बन सकता है. अगर पुराने स्टॉक का समय पर उठाव नहीं हुआ तो नई फसल को रखने के लिए राइस मिलों और मंडियों पर निर्भरता और बढ़ सकती है. इसलिए पंजाब सरकार और केंद्र के सामने सबसे जरूरी काम यही है कि धान की नई आवक शुरू होने से पहले पुराने अनाज को तेजी से दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जाए. इससे किसानों की फसल की खरीद भी सुचारू रह सकेगी और राज्य की भंडारण व्यवस्था पर भी दबाव कम होगा.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़