देश के 64 फीसदी कृषि क्षेत्र पर सूखे का खतरा, बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर बढ़ी चिंता

Kharif Crop 2026: CREAMS Lab की सैटेलाइट रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अगस्त तक देश के करीब 64 फीसदी कृषि क्षेत्र में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसा तनाव दिख रहा है. खरीफ बुवाई का 92 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन कम बारिश से रागी, तूर, धान और सोयाबीन जैसी फसलों पर दबाव बढ़ गया है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 15 Aug, 2026 | 11:55 AM

Drought Stress India: देश में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी होने की ओर है लेकिन अब किसानों की चिंता खेत में खड़ी फसल को लेकर बढ़ गई है. इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR) की CREAMS लैब की सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, 12 अगस्त तक देश के करीब 64 फीसदी कृषि क्षेत्र में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसा तनाव दिखाई दे रहा है. यह स्थिति खासतौर पर उन इलाकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, जहां खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है. रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब देश में सामान्य खरीफ बुवाई का करीब 92 फीसदी काम पूरा हो चुका है. यानी बड़ी मात्रा में फसल खेतों में खड़ी है और अब उसके लिए पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी है.

पिछले साल से 38 फीसदी ज्यादा क्षेत्र प्रभावित

CREAMS लैब के आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश के कई हिस्सों में हल्के सूखे से लेकर गंभीर और बेहद गंभीर सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है. सूखे से प्रभावित कृषि क्षेत्र पिछले साल इसी समय के मुकाबले करीब 38 फीसदी ज्यादा बताया गया है. इसका मतलब है कि बारिश की कमी का असर सिर्फ बुवाई पर ही नहीं, बल्कि पहले से बोई जा चुकी फसलों की बढ़वार पर भी पड़ने लगा है. मिट्टी में नमी कम होने से पौधों को जरूरी पानी नहीं मिल पा रहा है.

पंजाब से तमिलनाडु तक बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई बड़े कृषि राज्यों में सूखे का असर देखने को मिल रहा है. पंजाब, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और तमिलनाडु के कई इलाकों में बहुत गंभीर सूखे की स्थिति बताई गई है. इन राज्यों में धान, सोयाबीन, दाल और दूसरी खरीफ फसलों की बड़े पैमाने पर खेती होती है. ऐसे में अगर बारिश की कमी आगे भी जारी रहती है, तो फसलों की बढ़वार और पैदावार पर असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर भी पड़ने की आशंका है.

अगस्त में बारिश सुधरी, फिर भी कमी बरकरार

अगस्त में कुछ इलाकों में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पूरे मॉनसून सीजन की तस्वीर अभी भी चिंता बढ़ाने वाली है. 1 जून से 14 अगस्त तक देश में कुल बारिश सामान्य से करीब 12.6 फीसदी कम रही है. क्षेत्रों की बात करें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी करीब 27 फीसदी रही. वहीं दक्षिणी प्रायद्वीप में करीब 20 फीसदी और उत्तर-पश्चिम भारत में करीब 11 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. ऐसे में जिन इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां खेती और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ने की चिंता बनी हुई है.

खेत की नमी कम होने से फसल पर असर

बारिश कम होने के साथ मिट्टी में नमी की कमी भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है. कई इलाकों में खेतों और पौधों में पानी की कमी के संकेत दिख रहे हैं. इसका असर फसलों की बढ़वार पर पड़ सकता है. खासकर उन इलाकों में स्थिति ज्यादा मुश्किल हो सकती है, जहां सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है और किसान बारिश पर निर्भर हैं. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों पर इसका असर और बढ़ सकता है.

रागी की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों के रकबे पर भी पड़ा है. सामान्य स्थिति के मुकाबले खरीफ फसलों की बुवाई में करीब 21 लाख हेक्टेयर की कमी बताई गई है. सबसे ज्यादा गिरावट रागी की बुवाई में करीब 34 फीसदी रही. इसके बाद तूर की बुवाई करीब 4.03 फीसदी, धान की 3.65 फीसदी और सोयाबीन की बुवाई करीब 1.44 फीसदी कम रही.

अब आगे की बारिश सबसे अहम

फिलहाल किसानों और कृषि विभाग की नजर आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी है. अगर पर्याप्त बारिश होती है तो खेतों में नमी की स्थिति सुधर सकती है और खड़ी फसलों को राहत मिल सकती है. लेकिन बारिश की कमी आगे भी जारी रहती है, तो खरीफ फसलों की पैदावार और किसानों की आमदनी पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी.

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