धान किसानों के लिए जरूरी सलाह.. सही उर्वरक मात्रा अपनाएं, बढ़ेगी उपज और घटेगी खेती की लागत

धान की रोपाई के बाद उर्वरकों का सही मात्रा में इस्तेमाल बेहतर उत्पादन की सबसे बड़ी कुंजी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद देना सबसे लाभदायक रहता है. संतुलित पोषण अपनाने से फसल स्वस्थ रहती है, लागत कम होती है और किसानों को बेहतर उपज व अधिक मुनाफा मिलता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 Aug, 2026 | 06:00 AM

Paddy Farming: धान की अच्छी पैदावार केवल समय पर रोपाई करने से नहीं मिलती, बल्कि रोपाई के बाद फसल को सही समय और सही मात्रा में पोषण देना भी बेहद जरूरी होता है. कई किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल कर देते हैं, जिससे फसल को फायदा होने के बजाय नुकसान होने लगता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार धान की फसल में उर्वरकों का प्रयोग हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए. सबसे बेहतर तरीका यह है कि खेत की मिट्टी का परीक्षण कराकर उसी के अनुसार उर्वरकों की मात्रा तय की जाए.

मिट्टी परीक्षण के आधार पर तय करें उर्वरक की मात्रा

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, कि मिट्टी परीक्षण से खेत  में पहले से मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल जाती है. इससे किसान केवल उतनी ही मात्रा में खाद डालते हैं, जितनी फसल को वास्तव में जरूरत होती है. इससे खेती की लागत भी कम होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है. यदि मिट्टी परीक्षण उपलब्ध न हो, तो सामान्य परिस्थितियों में एक एकड़ धान की फसल के लिए करीब 48 किलोग्राम नाइट्रोजन, 24 किलोग्राम फास्फोरस और 16 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता मानी जाती है. हालांकि यह मात्रा मिट्टी की उर्वरता और किस्म के अनुसार बदल सकती है.

नाइट्रोजन एक साथ न डालें, किस्तों में करें प्रयोग

विशेषज्ञ के अनुसार धान की फसल  में नाइट्रोजन का पूरा हिस्सा एक बार में नहीं डालना चाहिए. इससे काफी मात्रा में नाइट्रोजन पानी के साथ बह जाती है या हवा में उड़ जाती है, जिससे पौधों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता. बेहतर परिणाम के लिए नाइट्रोजन को अलग-अलग चरणों में देना चाहिए. पहली मात्रा रोपाई के समय या उसके तुरंत बाद, दूसरी सक्रिय बढ़वार के दौरान और तीसरी बालियां निकलने से पहले देने पर फसल को पर्याप्त पोषण मिलता है. वहीं फास्फोरस और पोटाश का अधिकांश भाग खेत की अंतिम तैयारी या रोपाई के समय ही देना अधिक लाभकारी माना जाता है.

अधिक खाद डालने से हो सकता है नुकसान

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से पौधों की बढ़वार असंतुलित  हो जाती है. इससे पौधे कमजोर पड़ सकते हैं, कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है और फसल गिरने का खतरा भी रहता है. इसके अलावा अधिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए किसानों को हमेशा संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाना चाहिए. खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना, खरपतवार नियंत्रण करना और समय-समय पर फसल का निरीक्षण करना भी जरूरी है. यदि उर्वरकों का प्रयोग वैज्ञानिक सलाह और सही मात्रा में किया जाए, तो धान की फसल स्वस्थ रहती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 7 Aug, 2026 | 06:00 AM

लेटेस्ट न्यूज़