केज कल्चर पर सरकार दे रही बंपर अनुदान, 20 अप्रैल तक करें आवेदन, मछुआरों की बढ़ेगी कमाई

मध्यप्रदेश सरकार की केज कल्चर योजना मछुआरों के लिए कमाई बढ़ाने का शानदार मौका लेकर आई है. इस योजना में प्रति केज लाखों रुपये तक अनुदान दिया जाएगा. आधुनिक तकनीक से जलाशयों में मछली पालन बढ़ेगा, उत्पादन मजबूत होगा और मछुआरों की आय में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Apr, 2026 | 06:39 PM

Fish Cage Culture: मछली पालन से कमाई बढ़ाने की सोच रहे मछुआरों और समितियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. मध्यप्रदेश सरकार ने नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के तहत केज कल्चर योजना शुरू कर दी है. इस योजना का मकसद जलाशयों में आधुनिक तरीके से मछली उत्पादन बढ़ाना और मछुआरों की आय में इजाफा करना है. खास बात यह है कि सरकार प्रति केज लाखों रुपये तक अनुदान दे रही है. अगर आप मछली पालन से बेहतर कमाई चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए सुनहरा मौका साबित हो सकती है. आवेदन की आखिरी तारीख 20 अप्रैल तय की गई है, इसलिए समय रहते तैयारी करना जरूरी है.

क्या है केज कल्चर योजना और कितने केज लगेंगे

मध्यप्रदेश शासन के मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग ने इस योजना के तहत राज्य में कुल 10 हजार केज लगाने का लक्ष्य रखा है. केज कल्चर में जलाशय  के अंदर जाल जैसी मजबूत संरचना लगाकर उसमें मछलियों का पालन किया जाता है. इससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन मिलता है और मछुआरों की कमाई बढ़ती है. नीति के अनुसार 100 से 1000 हेक्टेयर तक के जलाशयों में योजना का संचालन विभाग करेगा, जबकि 1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों में इसे मत्स्य महासंघ के माध्यम से लागू किया जाएगा.

किसे मिलेगा फायदा और कितने केज मिलेंगे

इस योजना में SC, ST, OBC, सामान्य वर्ग के पारंपरिक मछुआरे, महिला समूह, स्व-सहायता समूह और मत्स्य सहकारी समितियां  आवेदन कर सकती हैं. सरकार ने प्रति हितग्राही अधिकतम 18 केज देने का प्रावधान रखा है. वहीं किसी समिति या संस्था को अधिकतम 72 केज तक आवंटित किए जा सकते हैं. इससे छोटे मछुआरे भी लाभ ले सकेंगे और बड़ी समितियां बड़े स्तर पर मछली उत्पादन शुरू कर सकेंगी. यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो जलाशयों में आधुनिक तकनीक से मछली पालन करना चाहते हैं.

कितना मिलेगा अनुदान, पूरी गणना समझिए

इस योजना के तहत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना  (PMMSY) के माध्यम से अनुदान दिया जाएगा. प्रति केज इकाई लागत 3 लाख रुपये तय की गई है. SC, ST और सभी वर्ग की महिलाओं को 60 फीसदी अनुदान, यानी 1.80 लाख रुपये प्रति केज मिलेगा. सामान्य और OBC वर्ग के पुरुषों को 40 फीसदी अनुदान, यानी 1.20 लाख रुपये प्रति केज दिया जाएगा. सरकार शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा खुद दे रही है, जिससे मछुआरों पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे आधुनिक तरीके से मछली पालन शुरू कर पाएंगे.

आवेदन कैसे करें और अंतिम तारीख क्या है

इच्छुक मछुआरे और मछुआ समिति कार्यालय  उप संचालक मत्स्योद्योग, बालाघाट में जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं. आवेदन की अंतिम तारीख 20 अप्रैल तय की गई है. इसके बाद प्राप्त आवेदनों की जांच कलेक्टर द्वारा गठित समिति करेगी और केज का आवंटन लॉटरी पद्धति से होगा. इसका मतलब है कि प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और पात्र लोगों को निष्पक्ष तरीके से मौका मिलेगा. योजना की पूरी जानकारी के लिए संबंधित कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.

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