Integrated Farming: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करना, फसलों का सही दाम दिलाना और नुकसान होने पर भरपाई सुनिश्चित करना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि अब केवल धान और गेहूं पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और दूसरी ज्यादा मुनाफे वाली फसलों की खेती की ओर बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में खेती की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यहां ज्यादातर किसानों के पास छोटी जोत है. इसलिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को जमीन पर उतारना जरूरी है. उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के साथ मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसानों की आय में अच्छी बढ़ोतरी की जा सकती है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी की सेहत को बचाना बहुत जरूरी है. उन्होंने किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी की जांच कराए ज्यादा खाद डालने से खेती का खर्च बढ़ता है और जमीन की उर्वरता भी खराब होती है. इसलिए किसानों को जरूरत के हिसाब से ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए. शिवराज सिंह ने प्राकृतिक खेती को भी प्रधानमंत्री की प्राथमिकता बताया और किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती जरूर अपनाएं.
1 जून से शुरू होगा ये कार्यक्रम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 1 जून से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा. इस अभियान के तहत किसानों को संतुलित खाद उपयोग, मिट्टी की सेहत, आधुनिक खेती तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाले उर्वरकों का गलत इस्तेमाल रोकना जरूरी है, ताकि खाद सिर्फ किसानों और खेती के काम में ही उपयोग हो.
सख्त अभियान चलाया जाएगा
उन्होंने नकली खाद, खराब बीज और फर्जी कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ बड़ा अपराध बताया और कहा कि इनके खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा. साथ ही राज्यों से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की, ताकि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के कृषि उत्पाद मिल सकें और उनकी लागत कम हो. शिवराज सिंह चौहान ने दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में इन फसलों के जरिए देश को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी क्षमता है. उन्होंने कहा कि किसान तभी दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाएंगे, जब उन्हें अपनी उपज की खरीद की गारंटी मिलेगी. इसलिए पीएम-आशा, नैफेड, एनसीसीएफ और राज्य एजेंसियों की भूमिका को और मजबूत करना जरूरी है.
पूर्वी भारत से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत के कई राज्यों में ऐसी फसलों की खेती की बड़ी संभावनाएं हैं, जिनसे किसानों को देश के बाजारों के साथ-साथ निर्यात से भी अच्छा लाभ मिल सकता है. इसके लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे, बेहतर नर्सरी व्यवस्था और बाजार की जरूरत के अनुसार खेती को बढ़ावा देना जरूरी है. दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन में ये बातें कहीं.