सर्दियों की कड़ाके की ठंड और शीतलहर गाय-भैंस की सेहत पर सीधा असर डालती है. सही देखभाल न होने पर बीमारी और दूध उत्पादन में गिरावट आती है. समय रहते पशुओं को ठंड से बचाने के आसान उपाय अपनाकर नुकसान और इलाज के बढ़ते खर्च से बचा जा सकता है.
Dairy Farming : दूध की क्वालिटी अच्छी होगी तभी डेयरी किसान को सही दाम मिल पाएगा. आज बाजार में फैट और SNF के आधार पर भुगतान होता है. अच्छी बात यह है कि दूध की क्वालिटी बढ़ाने के लिए ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. सही सफाई, देखभाल और संतुलित आहार से बड़ा फायदा मिल सकता है.
नमक का एक बड़ा फायदा यह है कि यह पशुओं की पाचन क्रिया को सुधारता है. नमक लार के उत्पादन को बढ़ाता है और लार ही वह माध्यम है, जो चारे को ठीक से चबाने और पेट में पचाने में मदद करती है. जब पाचन सही रहता है, तो पशु आहार से मिलने वाले पोषक तत्वों को अच्छी तरह ले पाते हैं.
मौसम बदलने पर पशु अक्सर कमजोर पड़ जाते हैं और दूध भी कम देने लगते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह उनके शरीर में विटामिन और मिनरल की कमी होती है. समय पर पोषण पूरा न होने पर प्रतिरोधक क्षमता घटती है, जिससे मामूली संक्रमण भी पशुओं को पकड़ लेता है. सही आहार और सप्लीमेंट से पशु स्वस्थ रह सकते हैं.
दिसंबर की कड़ी ठंड में पशुओं को स्वस्थ रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने पशुपालकों के लिए खास सुझाव जारी किए हैं. ये सलाहें दूध देने वाले पशुओं की सेहत, गर्माहट और पोषण का ध्यान रखने में मदद करेंगी और किसानों की कमाई पर भी सकारात्मक असर डालेंगी.
सर्दियों में खेतों में उगने वाला बथुआ किसी आम खरपतवार की तरह नजर आता है, लेकिन पशुओं के लिए यह बेहद फायदेमंद चारा साबित होता है. यह दूध बढ़ाने, शरीर को गर्म रखने और पाचन सुधारने में मदद करता है. आसानी से उपलब्ध यह पौधा किसानों और पशुपालकों दोनों के लिए सर्दियों में बड़ा सहायक बन जाता है.