मार्च में नींबू के बागों में न करें ये गलतियां, वरना गिर सकते हैं फूल! एक्सपर्ट से जानें बचाव के टिप्स
Lemon Farming: भारत में नींबू की खेती न सिर्फ किसानों की आमदनी का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह सही तकनीक और समय पर की गई देखभाल से बेहद लाभकारी साबित हो सकती है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, मार्च के महीने में पौधों की छंटाई, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट नियंत्रण करने से फलधारण बेहतर होता है और फल की गुणवत्ता भी शानदार बनती है.

डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, मार्च के महीने में नींबू के पौधों की हल्की छंटाई करना बेहद जरूरी है. सूखी और कमजोर शाखाओं को हटाने से पौधों में नई और स्वस्थ शाखाओं का विकास होता है, जिससे फल लगने की क्षमता बढ़ती है.

नींबू के पौधों में जिंक, बोरॉन और आयरन जैसी कमी होने पर फूल और फल कम लगते हैं. डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, 0.3% जिंक सल्फेट, बोरॉन और फेरस सल्फेट का पत्ती पर छिड़काव पौधों को जरूरी पोषण देता है और फूलों की संख्या बढ़ाता है.

मार्च में बढ़ते तापमान के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो जाती है. 10–15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए. ड्रिप सिंचाई प्रणाली जड़ों तक धीरे-धीरे नमी पहुंचाती है और पानी की बचत भी करती है.

मार्च में सिट्रस लीफ माइनर, सिट्रस पायला और स्केल कीट सक्रिय हो जाते हैं. नीम तेल, डाइमिथोएट और इमिडाक्लोप्रिड का सही छिड़काव करके इन कीटों से पौधों की सुरक्षा की जा सकती है.

नींबू के बागों की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है. पोषण, सिंचाई और कीट नियंत्रण का सही समय पर पालन करने से फलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार आता है.

अगर किसान मार्च में वैज्ञानिक तरीके से बाग की देखभाल करें, तो फलधारण बेहतर होता है, उत्पादन बढ़ता है और फलों की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट रहती है. यह किसानों की आय बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है.
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