Parametric Climate Insurance: भारत की खेती काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है. समय पर बारिश हो जाए तो फसल अच्छी होती है, लेकिन अगर मॉनसून कमजोर पड़ जाए या अल-नीनो जैसे मौसमीय बदलाव आ जाएं, तो इसका सीधा असर किसानों की आय, फसल उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या मौसम से होने वाले नुकसान की भरपाई का कोई ऐसा तरीका हो सकता है, जिससे किसानों को लंबा इंतजार भी न करना पड़े और आर्थिक नुकसान भी कम हो जाए? इसी जरूरत को देखते हुए अब पैरामेट्रिक क्लाइमेट इंश्योरेंस को एक अहम विकल्प माना जा रहा है.
क्या है पैरामेट्रिक क्लाइमेट इंश्योरेंस?
पैरामेट्रिक क्लाइमेट इंश्योरेंस ऐसा बीमा मॉडल है, जिसमें फसल के वास्तविक नुकसान का सर्वे करने के बजाय पहले से तय मौसम संबंधी संकेतकों को आधार बनाया जाता है. अगर तय सीमा से कम बारिश होती है या कोई अन्य निर्धारित मौसमीय घटना घटती है, तो बीमा राशि का भुगतान किया जा सकता है. इससे दावों के निपटान में लगने वाला समय कम होता है और प्रभावित लोगों तक राहत जल्दी पहुंच सकती है.
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की करीब 52 लाख करोड़ रुपये की कृषि अर्थव्यवस्था को अल-नीनो जैसे मौसमीय जोखिमों से बचाने में पैरामेट्रिक क्लाइमेट इंश्योरेंस बड़ी भूमिका निभा सकता है. यह पारंपरिक फसल बीमा से अलग है. इसमें नुकसान का आकलन करने के बजाय पहले से तय मौसम संबंधी मानकों, जैसे कम बारिश, अधिक तापमान या अन्य मौसमीय संकेतकों के आधार पर भुगतान किया जाता है. इससे किसानों और अन्य प्रभावित लोगों को जल्दी आर्थिक सहायता मिल सकती है.
सिर्फ खेती नहीं, कई सेक्टरों को भी मिल सकती है सुरक्षा
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-नीनो का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता. इससे लॉजिस्टिक्स, छोटे और मझोले उद्योग (MSME), गिग वर्कर्स और अन्य व्यवसाय भी प्रभावित हो सकते हैं. वहीं, बाढ़, लैंडस्लाइड, ज्यादा गर्मी और दूसरी मौसमीय घटनाएं घरों, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी असर डालती हैं. ऐसे में पैरामेट्रिक इंश्योरेंस के साथ फसल, स्वास्थ्य, घर, इंजीनियरिंग और मरीन इंश्योरेंस जैसी योजनाएं भी जोखिम कम करने में मददगार हो सकती हैं.
मौसम का बढ़ता जोखिम, बढ़ती बीमा की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि, जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे समय में बीमा केवल नुकसान की भरपाई का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है. समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता से किसान, परिवार और कारोबार दोबारा सामान्य स्थिति में लौटने की बेहतर स्थिति में आ सकते हैं.
आर्थिक सुरक्षा के लिए अहम हो सकता है यह मॉडल
रिपोर्ट के अनुसार, भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी की आजीविका खेती और मौसम पर निर्भर है, वहां मौसम आधारित बीमा मॉडल भविष्य में अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है. बदलते मौसम और बढ़ते जलवायु जोखिमों के बीच पैरामेट्रिक क्लाइमेट इंश्योरेंस आर्थिक झटकों को कम करने और लोगों को तेजी से राहत पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है.