गर्मी और उमस बढ़ते ही दुधारू पशुओं में जू और किलनी जैसी परजीवी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. ये छोटे परजीवी पशुओं की त्वचा से चिपककर खून चूसते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगते हैं और दूध उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. समय पर देखभाल, साफ-सफाई और सही घरेलू उपाय अपनाकर पशुपालक इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए नियमित निगरानी और स्वच्छ वातावरण सबसे जरूरी है.
साफ-सफाई से दूर होगी जू और किलनी की समस्या
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, पशुओं में जू और किलनी की समस्या का सबसे बड़ा कारण गंदगी और खराब प्रबंधन होता है. पशुओं को लंबे समय तक गीली, गंदी या नमी वाली जगह पर बांधने से परजीवियों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि पशुओं के रहने वाले स्थान की नियमित सफाई करनी चाहिए. गोबर और गंदे बिछावन को समय-समय पर हटाना चाहिए. साथ ही पशुओं को साफ पानी से नहलाने और उनके शरीर की जांच करने की आदत डालनी चाहिए, ताकि शुरुआत में ही समस्या का पता लगाया जा सके.
नीम का तेल है आसान घरेलू उपाय
जू और किलनी से बचाव के लिए पशुपालक नीम के तेल का उपयोग कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 10 मिलीलीटर नीम के तेल को एक लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर पशु के शरीर पर लगाया जा सकता है. इस मिश्रण को साफ कपड़े या स्प्रे की मदद से पशु के शरीर पर लगाएं. ध्यान रखें कि यह घोल पशु की आंख, नाक या मुंह के संपर्क में न आए. नियमित अंतराल पर इसका उपयोग करने से शरीर पर मौजूद परजीवियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
लापरवाही से कमजोर हो सकते हैं पशु
किलनी और जू केवल त्वचा पर परेशानी ही नहीं पैदा करते, बल्कि लंबे समय तक रहने पर पशुओं की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं. ये परजीवी खून चूसते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगते हैं. कई बार भूख कम होना, शरीर में कमजोरी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. इसलिए अगर पशु बार-बार शरीर खुजा रहा है, बेचैन है या उसकी त्वचा पर छोटे कीड़े दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय पर उपचार मिलने से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है.
नियमित देखभाल से स्वस्थ रहेंगे पशु
पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुओं की नियमित जांच करें और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. पशुओं के बाड़े में हवा और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. बरसात और गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतना जरूरी होता है, क्योंकि इस दौरान परजीवी तेजी से बढ़ते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, साफ-सफाई, संतुलित आहार और समय पर उपचार अपनाकर पशुओं को जू, किलनी और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे पशुओं की सेहत बेहतर रहती है और पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान से बचाव मिलता है.