भैंस पालने का झंझट छोड़िए! गाय की ये 3 देसी नस्लें कराएंगी तगड़ी कमाई, कम खर्चे में बहेंगी दूध की नदियां

डेयरी फार्मिंग में अब देसी गायें भैंसों को कड़ी टक्कर दे रही हैं. साहीवाल, गिर और हरियाणा जैसी नस्लें न केवल भारी मात्रा में दूध देती हैं, बल्कि इनकी रखरखाव लागत भी बेहद कम है. सरकारी योजनाओं के सहयोग से पशुपालक अब कम निवेश में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. बेहतर आय के लिए इन नस्लों को अपनाना एक स्मार्ट फैसला है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 18 Mar, 2026 | 11:00 PM

Desi Cow Breeds : आज के दौर में जब महंगाई आसमान छू रही है, खेती-किसानी के साथ एक एक्स्ट्रा कमाई का जरिया होना बहुत जरूरी है. अक्सर हमारे किसान भाई ज्यादा दूध के लालच में भैंस पालना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी अपनी देसी गायें अब भैंसों को कड़ी टक्कर दे रही हैं? जी हां, अब वो दिन गए जब गाय सिर्फ ‘पुण्य’ के लिए पाली जाती थी. आज की वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर नस्लों ने देसी गाय को मुनाफे की मशीन बना दिया है. अगर आप भी कम खर्च में ‘मोटा मुनाफा’ कमाना चाहते हैं, तो इन 3 देसी नस्लों पर दांव लगाना आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

साहीवाल- डेयरी जगत की असली दूध रानी

अगर आप चाहते हैं कि आपकी डेयरी में दूध की बाल्टियां  कभी खाली न रहें, तो साहीवाल से बेहतर कोई विकल्प नहीं है. मुख्य रूप से पंजाब और राजस्थान की शान कही जाने वाली यह गाय अपनी भारी-भरकम कद-काठी के बावजूद बहुत शांत स्वभाव की होती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रोजाना 15 से 25 लीटर तक दूध दे सकती है. साहीवाल का दूध  न केवल गाढ़ा होता है, बल्कि इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जबरदस्त होती है, जिससे पशु पर दवाइयों का खर्च कम आता है.

गिर गाय- गुजरात का गौरव और सेहत का खजाना

गुजरात के गिर जंगलों से निकलकर आज यह नस्ल पूरी दुनिया (खासकर ब्राजील) में तहलका मचा रही है. इसके लंबे लटके हुए कान और उभरा हुआ माथा इसकी असली पहचान है. गिर गाय प्रतिदिन 10 से 20 लीटर दूध देती है. इसकी सबसे बड़ी डिमांड इसके A2 क्वालिटी दूध  की वजह से है, जो आज के समय में शहरों में बहुत महंगे दामों पर बिकता है. अगर आप प्रीमियम दूध बेचकर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो गिर गाय आपके लिए बेस्ट है.

हरियाणा नस्ल- दूध भी और खेती में साथ भी

हरियाणा नस्ल की गाय उन किसानों के लिए वरदान है जो पशुपालन के साथ-साथ खेती भी करते हैं. इसे ‘ऑल-राउंडर’ नस्ल कहा जा सकता है. यह गाय रोजाना 10 से 15 लीटर दूध तो देती ही है, इसके बछड़े भी बहुत शक्तिशाली होते हैं जो खेतों में श्रम करने के काम आते हैं. यह नस्ल हर तरह के मौसम को झेलने की ताकत रखती है और साधारण चारे पर भी अच्छा उत्पादन देती है, जिससे किसान की लागत आधी हो जाती है.

सरकार भी दे रही है साथ

पशुपालकों की राह आसान करने के लिए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन  चला रही है. इस योजना का मकसद देसी नस्लों को बचाना और उन्हें और बेहतर बनाना है. सरकार अब ऐसी तकनीक (जैसे सैक्स-सॉर्टेड सीमेन) पर सब्सिडी दे रही है, जिससे आपके घर सिर्फ बछिया ही पैदा होगी. इससे किसानों को दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है. अगर आप भी नई डेयरी शुरू करना चाहते हैं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर कम निवेश में अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

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Published: 18 Mar, 2026 | 11:00 PM
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