India fertiliser stock: देश में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और इसी बीच उर्वरकों को लेकर सरकार ने बड़ा भरोसा दिलाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों से रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करने की अपील के बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है.
सरकार के मुताबिक खरीफ सीजन 2026 के लिए खाद की उपलब्धता सामान्य से बेहतर स्थिति में है. हालांकि दूसरी तरफ उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ी है. अप्रैल 2026 में देश में यूरिया, डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण किसानों में खाद को लेकर चिंता बढ़ी, जिसकी वजह से शुरुआती दिनों में जमकर खरीदारी हुई.
पीएम मोदी ने किसानों से क्या अपील की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसानों से रासायनिक खाद के इस्तेमाल को 25 से 50 प्रतिशत तक कम करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता कमजोर हो रही है.
प्रधानमंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती और संतुलित पोषक तत्वों के इस्तेमाल की ओर बढ़ने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में यूरिया की एक बोरी लगभग 3000 रुपये तक बिकती है, लेकिन भारत सरकार किसानों को भारी सब्सिडी देकर इसे 300 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध करा रही है. उन्होंने किसानों से कहा कि देश की मिट्टी को बचाने और विदेशी मुद्रा खर्च कम करने के लिए रासायनिक खाद के उपयोग को सीमित करना जरूरी है.
क्या बोले शिवराज सिंह चौहान?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विश्वास जताया कि रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक कम करने के बाद भी खेती की उत्पादकता बनाए रखी जा सकती है. उन्होंने कहा कि अगर किसान संतुलित पोषण, जैविक विकल्प और आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल करें तो कम खाद में भी अच्छी पैदावार संभव है. सरकार अब राज्यों के साथ मिलकर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है.
अप्रैल में खाद की बिक्री में बड़ा उछाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में चार प्रमुख उर्वरकों की कुल बिक्री 23.59 लाख टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 18.9 लाख टन थी. यानी एक साल में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डीएपी खाद में देखने को मिली. डीएपी की बिक्री 57 प्रतिशत बढ़कर 3.45 लाख टन तक पहुंच गई.
कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री में भी 44 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 5.15 लाख टन तक पहुंच गई.
यूरिया की बिक्री 14 प्रतिशत बढ़कर 13.93 लाख टन हो गई, जबकि एमओपी की बिक्री 12 प्रतिशत बढ़कर 1.06 लाख टन तक पहुंची.
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन से पहले किसानों ने खाद की उपलब्धता को लेकर पहले से ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी है.

अप्रैल में उर्वरकों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़ी
क्या है ‘पैनिक बाइंग’ की वजह?
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक तनाव के बाद शुरुआती दौर में कुछ इलाकों में “पैनिक बाइंग” यानी घबराहट में ज्यादा खरीदारी देखने को मिली. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जमाखोरी रोकने और उर्वरकों के गलत इस्तेमाल पर निगरानी रख रही हैं. कई राज्यों में व्यावसायिक उपयोग के लिए खाद की अवैध बिक्री पर भी कार्रवाई की जा रही है.
खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक
सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों का मौजूदा स्टॉक सामान्य स्तर से काफी बेहतर है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस समय कुल मांग का 51 प्रतिशत से ज्यादा स्टॉक उपलब्ध है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह स्तर लगभग 33 प्रतिशत रहता है. सरकार ने कहा कि भारत की उर्वरक सुरक्षा पूरी तरह नियंत्रण में है और किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अपर सचिव अपर्णा एस शर्मा ने बताया कि देश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में बाजार में 97 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
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— PB-SHABD (@PBSHABD) May 11, 2026
भारत में कितना हो रहा उत्पादन?
सरकार के अनुसार युद्ध और वैश्विक संकट के बावजूद देश में घरेलू उत्पादन लगातार जारी है. मार्च-अप्रैल के दौरान कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 67.76 लाख टन रहा. इसमें यूरिया का उत्पादन 40.72 लाख टन, डीएपी का 5.39 लाख टन और कॉम्प्लेक्स खाद का उत्पादन 13.65 लाख टन रहा. हालांकि भारत अभी भी एमओपी यानी म्यूरेट ऑफ पोटाश के मामले में पूरी तरह आयात पर निर्भर है.
बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ
वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. खासतौर पर यूरिया की कीमतों में भारी तेजी देखी गई है. कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है. ऐसे में सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है.
सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी पर लगभग 2.21 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे. वहीं FY27 के लिए बजट अनुमान 1.77 लाख करोड़ रुपये रखा गया है.
किसानों के लिए क्या है सबसे बड़ा संदेश?
सरकार और कृषि विशेषज्ञ लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि सिर्फ ज्यादा खाद डालने से पैदावार नहीं बढ़ती. जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद मिट्टी की सेहत खराब कर सकती है.
अब सरकार संतुलित पोषण, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है. किसानों को भी कम लागत और बेहतर मिट्टी स्वास्थ्य के लिए नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है.
आने वाले समय में क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रासायनिक खाद के उपयोग को धीरे-धीरे संतुलित किया गया और किसानों को सही विकल्प दिए गए तो इससे खेती की लागत कम हो सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधर सकती है. हालांकि इसके लिए किसानों को जागरूक करना और पर्याप्त जैविक विकल्प उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होगा.
फिलहाल सरकार का दावा है कि खरीफ सीजन के लिए देश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है.