दशहरी से केसर तक… भारतीय आमों के लिए खुला नया विदेशी बाजार, पहली बार आइसलैंड में हुआ प्रमोशन इवेंट

Indian Mango Export: भारतीय आम अब आइसलैंड के बाजार में भी अपनी पहचान बनाने की तैयारी में हैं. पहली बार वहां भारतीय आमों के प्रचार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर आमों को पेश किया गया.

नोएडा | Published: 27 Jun, 2026 | 01:25 PM

Mango Export: भारतीय आमों की मिठास अब दुनिया के नए देशों तक पहुंच रही है. इसी कड़ी में पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह आयोजन भारतीय दूतावास, रेकजाविक और APEDA के संयुक्त प्रयास से 24 जून को रेकजाविक और 25 जून 2026 को उत्तरी आइसलैंड के अकुरेयरी शहर में हुआ. इस कार्यक्रम का मकसद भारतीय आमों की बेहतरीन क्वालिटी, स्वाद और उनकी निर्यात संभावनाओं से आइसलैंड के कारोबारियों और उपभोक्ताओं को परिचित कराना था.

पहली बार आइसलैंड में हुआ भारतीय आमों का प्रमोशन

कार्यक्रम में लोगों को भारतीय आमों की अलग-अलग किस्मों और उनकी खासियतों के बारे में जानकारी दी गई. इसमें व्यापारियों, आयातकों, राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस आयोजन का उद्देश्य आइसलैंड में भारतीय आमों के लिए नए बाजार तैयार करना, व्यापार बढ़ाना और भारत व आइसलैंड के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना था.

भारतीय आमों की क्वालिटी की हुई सराहना

कार्यक्रम में भारत के राजदूत आर. रवींद्र ने कहा कि भारतीय आम अपनी बेहतरीन क्वालिटी, मिठास और खुशबू की वजह से दुनिया भर में खास पहचान रखते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के प्रीमियम आम आइसलैंड के लोगों को भी पसंद आएंगे और वहां के बाजार में अपनी मजबूत जगह बना पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारत और आइसलैंड के बीच कृषि व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते और मजबूत होंगे.

भारत-ईएफटीए समझौते से बढ़ सकती है मांग

आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनारसन ने कहा कि भारत-ईएफटीए (India–EFTA) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) भारतीय आमों के निर्यात को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. उनका मानना है कि इस समझौते से भारत और आइसलैंड के बीच कृषि उत्पादों का व्यापार और मजबूत होगा तथा भारतीय फलों को नए बाजार मिलेंगे. वहीं, भारतीय दूतावास की द्वितीय सचिव अनीशा तोमर ने कार्यक्रम में भारत में आम उत्पादन पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है.

इन चार किस्मों ने जीता लोगों का दिल

कार्यक्रम में मेहमानों को भारत के चार लोकप्रिय आमों का स्वाद चखाया गया. इनमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर शामिल थे. इन सभी किस्मों की मिठास, सुगंध और स्वाद ने वहां मौजूद लोगों को काफी प्रभावित किया. प्रतिभागियों ने भारतीय आमों की क्वालिटी की खुलकर सराहना की.

आइसलैंड में बन सकता है बड़ा बाजार

फिलहाल आइसलैंड अपनी जरूरत का ज्यादातर आम थाईलैंड, ब्राजील, कंबोडिया, घाना और पेरू से मंगाता है. साल 2025 में आइसलैंड ने करीब 33 लाख अमेरिकी डॉलर के आम आयात किए थे. इनमें से लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर के आम सिर्फ थाईलैंड से खरीदे गए थे. भारतीय दूतावास के मुताबिक, स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि आइसलैंड में आम काफी पसंद किया जाता है. वहां लोग आम का इस्तेमाल स्मूदी, डेजर्ट और फ्रूट सलाद जैसी कई चीजों में करते हैं. ऐसे में भारतीय आमों के लिए आइसलैंड के बाजार में अच्छी संभावनाएं नजर आ रही हैं.

किसानों और निर्यातकों के लिए अच्छी खबर

आइसलैंड में पहली बार आयोजित यह भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम देश के कृषि निर्यात के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. अगर भारतीय आमों को वहां स्थायी बाजार मिल जाता है, तो इसका सीधा फायदा देश के आम उत्पादक किसानों और निर्यातकों को मिलेगा. इससे भारतीय आमों के लिए नए विदेशी बाजार खुलेंगे, उनकी दुनिया भर में पहचान और मजबूत होगी. साथ ही कृषि निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा और भारतीय आम ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंच सकेंगे.

Topics: