Basmati Farming: बासमती की बंपर पैदावार चाहिए? जुलाई में नर्सरी तैयार करते समय अपनाएं ये 6 जरूरी टिप्स
Basmati Dhan Ki Kheti: अगर आप इस साल बासमती धान की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो सिर्फ अच्छी किस्म का बीज खरीदना ही काफी नहीं है. असली खेल नर्सरी तैयार करने से शुरू होता है. खेती के शुरुआती कुछ दिनों में की गई छोटी-सी गलती भी पैदावार और चावल की क्वालिटी पर बड़ा असर डाल सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर किसान जुलाई में सही तरीके से नर्सरी तैयार करें, बीज की सही मात्रा रखें और शुरुआती देखभाल पर ध्यान दें, तो बासमती की फसल न सिर्फ बेहतर होगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं बासमती की बंपर पैदावार के लिए 6 सबसे जरूरी टिप्स.
बासमती धान की नर्सरी तैयार करने के लिए जुलाई सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस दौरान मॉनसून की बारिश और अनुकूल तापमान पौधों की तेज बढ़वार में मदद करते हैं. सही समय पर नर्सरी तैयार करने से रोपाई भी समय पर होती है और फसल को पूरा बढ़ने का मौका मिलता है.
अच्छी पैदावार की शुरुआत अच्छे बीज से होती है. इसलिए हमेशा प्रमाणित, साफ और रोगमुक्त बीज ही खरीदें. खराब या संक्रमित बीज लगाने से फसल में शुरू से ही बीमारियां लग सकती हैं, जिससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों प्रभावित होते हैं.
एक एकड़ खेत की रोपाई के लिए नर्सरी तैयार करते समय केवल 3.5 से 4 किलोग्राम बीज ही पर्याप्त होता है. ज्यादा बीज डालने से नर्सरी बहुत घनी हो जाती है, जिससे पौधे कमजोर रह जाते हैं. वहीं कम बीज डालने पर पर्याप्त पौधे तैयार नहीं हो पाते.
बीज बोने से पहले उन्हें फफूंदनाशी (फंगीसाइड) से उपचारित जरूर करें. इससे फंगस और बीज जनित बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है. स्वस्थ पौधे आगे चलकर बेहतर बढ़वार करते हैं और कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च भी कम होता है.
बीज डालने के बाद नर्सरी की क्यारियों में हल्की नमी बनाए रखें. समय-समय पर खरपतवार हटाएं और जरूरत के अनुसार जैविक खाद या संतुलित पोषक तत्व दें. अच्छी देखभाल से पौधे मजबूत बनते हैं और मुख्य खेत में लगाने के बाद तेजी से विकास करते हैं.
जब पौधे 25 से 30 दिन के हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में रोप दें. सही समय पर रोपाई करने से पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं, फसल मजबूत बनती है और लंबे, खुशबूदार बासमती चावल के साथ बेहतर पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है.