गुड़हल का पौधा अचानक मुरझा रहा है? इन 5 संकेतों को नजरअंदाज किया तो फूल आना हो जाएगा बंद, जानें
Hibiscus Gardening Tips: सुबह-सुबह जब गुड़हल की कली खिलने की बजाय मुरझाई दिखे या पत्तियों पर अजीब से दाग नजर आने लगें, तो समझ लीजिए पौधा खामोशी से मदद मांग रहा है. अक्सर हम धूप-पानी का दोष मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असली वजह अंदर छुपे कीट और रोग होते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पौधे को खोखला कर देते हैं. अच्छी बात ये है कि अगर इनके शुरुआती संकेत पहचान लिए जाएं, तो गुड़हल को फिर से हरा-भरा और फूलों से लदा बनाया जा सकता है. बस जरूरत है सही जानकारी और सही वक्त पर एक्शन लेने की.
गुड़हल के पौधों में पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे दिखना पत्ती धब्बा रोग का संकेत है. यह फंगस संक्रमण से होता है, जिससे पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं. समय पर संक्रमित पत्तियों को हटाकर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने से पौधा दोबारा स्वस्थ हो सकता है.
अगर गुड़हल की बढ़वार अचानक रुक जाए और पौधा बिना वजह गिरने लगे, तो यह जड़ सड़न रोग हो सकता है. इस स्थिति में जड़ें काली होकर सड़ने लगती हैं. शुरुआती लक्षण दिखते ही कार्बेन्डाजिम को पानी में मिलाकर मिट्टी में डालना बेहद असरदार उपाय है.
छोटे हरे रंग के एफिड कीट गुड़हल की कलियों और नई पत्तियों से चिपक जाते हैं. इनके कारण पत्तियां मुड़ने लगती हैं और फूल सही तरह से खिल नहीं पाते. हफ्ते में एक बार नीम तेल का छिड़काव एफिड से बचाव का सुरक्षित घरेलू तरीका है.
मिलीबग गुड़हल के लिए सबसे खतरनाक कीटों में से एक है. इसके कारण पौधे पर सफेद परत जम जाती है और पौधा धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है. प्रभावित हिस्सों की कटाई और नीम तेल या क्लोरपायरीफॉस का सही मात्रा में छिड़काव पौधे को बचा सकता है.
छोटी मकड़ियां पत्तियों के नीचे जाला बनाकर रस चूसती हैं, जिससे पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं. नियमित पानी का छिड़काव और जरूरत पड़ने पर डायकोफोल दवा का इस्तेमाल इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है.
गुड़हल के पौधे को कीट और रोगों से बचाने के लिए सही धूप, संतुलित पानी, समय-समय पर कटाई और साफ-सफाई बेहद जरूरी है. शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर की गई छोटी देखभाल पौधे को बड़े नुकसान से बचा सकती है.