चावल के बाद मिर्च निर्यात पर संकट! चीन ने मिर्च की 3 खेप लौटाईं, भारतीय कंपनियों पर लगाई रोक

चीन ने कीटनाशक मेथामिडोफोस के अवशेष मिलने पर भारतीय सूखी लाल मिर्च की कई खेपों को खारिज कर दिया है और तीन निर्यातकों पर रोक लगाई है. चीन, भारतीय मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार है. इस घटना से निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर नए सवाल खड़े हो गए हैं.

नोएडा | Updated On: 11 Jun, 2026 | 10:48 AM

Red Chilli Export: चीन ने भारत से भेजी गई सूखी लाल मिर्च की कम से कम तीन खेपों को खारिज कर दिया है और तीन भारतीय निर्यातक कंपनियों पर अस्थायी रोक लगा दी है. चीन का आरोप है कि इन खेपों में कीटनाशक मेथामिडोफोस के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए गए हैं. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को भी वापस लौटा दिया था.

भारतीय सूखी लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार चीन ने कहा है कि मिर्च में मेथामिडोफोस की अधिक मात्रा पाई गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह रसायन अधिक मात्रा में होने पर मानव तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर डाल सकता है. वहीं, चीन की इस कार्रवाई से भारतीय मिर्च निर्यातकों की चिंता  बढ़ गई है. पहले से ही चीन से मांग में कमी देखने को मिल रही थी और अब आयात पर रोक लगने से निर्यात कारोबार पर और दबाव बढ़ सकता है. गौरतलब है कि भारत से निर्यात होने वाली लाल मिर्च का एक बड़ा हिस्सा हर साल चीन जाता है. चीन भारतीय मिर्च का उपयोग ओलियोरेजिन (मसाला अर्क), खाद्य प्रसंस्करण और विभिन्न खाद्य उत्पादों में करता है, जिसके कारण वहां इसकी लगातार मांग बनी रहती है.

1.9 लाख टन लाल मिर्च का निर्यात

चीन मुख्य रूप से भारत की तेजा किस्म की लाल मिर्च खरीदता है, जिसका इस्तेमाल ओलियोरेजिन (मसाला अर्क) निकालने में किया जाता है. भारत से चीन को हर साल आमतौर पर 1.5 लाख से 1.9 लाख टन लाल मिर्च का निर्यात होता है. हालांकि, 2024-25 में चीन को मिर्च निर्यात में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 2.36 लाख टन तक पहुंच गया. वहीं, भारत का कुल लाल मिर्च निर्यात 2024-25 में 19 प्रतिशत बढ़कर 7.15 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष 6.01 लाख टन था.

इस वजह से मिर्च की खेप खारिज

इस बीच, मिर्च की खेपों में मेथामिडोफोस (Methamidophos) के अवशेष मिलने पर चिंता बढ़ गई है. दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने बिजनेसलाइन को कहा कि भारत में मेथामिडोफोस को कृषि उपयोग के लिए अलग से मंजूरी नहीं मिली है. हालांकि, यह एसीफेट (Acephate) नामक कीटनाशक  के टूटने से बनने वाला अवशेष हो सकता है. एसीफेट का इस्तेमाल भारत में कुछ फसलों पर अभी भी अनुमत है और कई मिर्च उत्पादक किसान इसका उपयोग करते हैं.

लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार चीन

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से भारतीय मिर्च निर्यातकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है, क्योंकि चीन भारतीय लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन द्वारा भारतीय मिर्च की खेप को खारिज किए जाने को केवल एक सामान्य नियम उल्लंघन का मामला नहीं माना जाना चाहिए. यह इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य सुरक्षा और कीटनाशक अवशेषों (रेजिड्यू) से जुड़े मानक लगातार सख्त होते जा रहे हैं.

दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने कहा कि हाल के दिनों में भारतीय चावल और मिर्च की खेपों को लेकर उठे सवाल दिखाते हैं कि चीन खाद्य सुरक्षा, कीटनाशक अवशेषों और जीएमओ से जुड़े नियमों  की कड़ी जांच कर रहा है. उन्होंने कहा कि भले ही समस्या कुछ खेपों तक सीमित हो, लेकिन इससे पूरे उत्पाद और निर्यात क्षेत्र की छवि प्रभावित हो सकती है.

भारतीय मिर्च की रिकॉर्ड खरीद

व्यापारिक के अनुसार, चीन ने 2024-25 में भारतीय मिर्च की रिकॉर्ड खरीद की थी उस समय भारत में मिर्च की कीमतें कम थीं, इसलिए चीन ने बड़ी मात्रा में खरीद कर भंडारण कर लिया था. हालांकि, 2025-26 में चीन की खरीद धीमी पड़ गई है. इसकी वजह चीन में पहले से मौजूद बड़ा स्टॉक और भारत में कम उत्पादन के कारण बढ़ती मिर्च कीमतें बताई जा रही हैं.

 

Published: 11 Jun, 2026 | 10:40 AM

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