महंगाई की मार, आज से कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ मंहगा.. कीमतों में भारी बढ़ोतरी
1 जून से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 42 रुपये बढ़ गई है, जबकि घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर रखे गए हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और एलपीजी का 30 दिन का भंडार सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है. 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में 913 रुपये में मिल रहा है.
Commercial LPG Price Hike: देश में आज यानी 1 जून से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है. तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और अन्य कारोबारों पर पड़ेगा, जो अपने कामकाज के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं. नई कीमतों के बाद दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 3,071.50 रुपये, मुंबई में 3,067 रुपये, कोलकाता में 3,255 रुपये और चेन्नई में 3,283 रुपये का हो गया है.
हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव के चलते पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में पिछले 10 दिनों के दौरान तेज बढ़ोतरी देखी गई है. इसके बावजूद घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है. पश्चिम एशिया में तीन महीने तक चले युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा, जिसका प्रभाव भारत पर भी देखने को मिला. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. देश के कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) आयात का लगभग 40 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 65 प्रतिशत और एलपीजी की 90 प्रतिशत आपूर्ति खाड़ी क्षेत्र से आती है. युद्ध के कारण इन ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत पर दबाव बढ़ा.
घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये में मिल रहा है. भारत में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में की जाती है. कीमतें वैश्विक कच्चे तेल के भाव, रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और सरकारी सब्सिडी नीति के आधार पर तय होती हैं. घरेलू रसोई गैस की कीमतें राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि इनका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है. फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है, क्योंकि रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं.
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प्राकृतिक गैस को लेकर क्या है सरकार की तैयारी
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ईंधन सुरक्षा मजबूत करने और पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर काम कर रही है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में कहा था कि सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कम से कम 30 दिनों का एलपीजी भंडार रखने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि सरकार रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) बढ़ाने पर भी काम कर रही है. एलपीजी के साथ-साथ कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का भंडार बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि किसी आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश की जरूरतें पूरी की जा सकें. सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है. सरकार और तेल कंपनियां मिलकर ऐसे कदम उठा रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकट या आपूर्ति में रुकावट का असर देश पर कम से कम पड़े.