वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड से धान की खेती में क्रांति, लागत 50 फीसदी घटी और पैदावार 100 क्विंटल के पार
Vermi Matrix Grid Method for paddy farming: किसान रामरतन निकुंज ने बताया कि पारंपरिक खेती के बजाय उन्होंने वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का अध्ययन किया. उन्होंने वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति अपनाई. जिसका नतीजा रहा कि पिछले वर्ष इस पद्धति से उन्हें एक हेक्टेयर में 106 क्विंटल तक धान उत्पादन मिला.
नई विधियों से खेती करना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. छत्तीसगढ़ में किसान कृषि विभाग के सहयोग से वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड विधि से धान की खेती कर रहे हैं. बीते साल भी इसी विधि से खेती की गई थी और किसानों की खेती लागत में 50 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी. जबकि, उत्पादन 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के पार पहुंचा था. इसी विधि से इस बार किसानों ने धान की खेती शुरू की है. इस विधि को धान की खेती में कम लागत और ज्यादा पैदावार को देखते हुए क्रांति बताया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले में खेती की तस्वीर बदल रही है. कृषि विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर रहे हैं. जिले के झगरहा गांव के किसान रामरतन निकुंज ने वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति अपनाकर धान उत्पादन का नया मॉडल पेश किया है. इस तकनीक से उन्होंने उत्पादन लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाते हुए प्रति हेक्टेयर 95 से 106 क्विंटल तक धान की पैदावार हासिल की है. वह अब जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं और किसान इस विधि को अपना रहे हैं.
किसान रामरतन ने खेती का आधुनिक तरीका अपनाया
किसान रामरतन निकुंज ने मीडिया को बताया कि पारंपरिक खेती के बजाय उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का अध्ययन किया. अपने जिले के कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति अपनाई. जिसका नतीजा रहा कि पिछले वर्ष इस पद्धति से उन्हें एक हेक्टेयर में 106 क्विंटल तक धान उत्पादन मिला. इस वर्ष भी उन्होंने इसी तकनीक से खेती की है और बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं.
106 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार
कोरबा जिले के कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल ने मीडिया को बताया कि पहले किसानों को श्री विधि से खेती का प्रशिक्षण दिया जाता था. लेकिन, अब लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए इलाके में वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति से धान की खेती की जा रही है. इसके नतीजे बेहद उल्लेखनीय और उत्साहजनक रहे हैं. विभाग का दावा है कि इस पद्धति से किसान प्रति हेक्टेयर 100 से 106 क्विंटल तक धान उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं.
क्या है वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड विधि
कृषि अधिकारी संजय पटेल ने बताया कि वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड तकनीक खेत को व्यवस्थित ग्रिड या खंडों में बांटकर निश्चित दूरी पर धान के पौधे रोपे जाते हैं और प्रत्येक खंड में वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का उपयोग किया जाता है. वर्मी कम्पोस्ट के नियमित उपयोग से पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कीट-व्याधियों का प्रकोप कम होता है. इसके परिणामस्वरूप रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च घटता है और बंपर पैदावार होती है. उन्होंने कहा कि किसानों ने परंपरागत तरीके और इस विधि से धान की खेती लागत में करीब 50 फीसदी का अंतर पाया है.
किसान रामरतन निकुंज (ऊपर). कृषि अधिकारी संजय पटेल (नीचे).
किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए मुफ्त ट्रेनिंग
कोरबा जिले में कृषि विभाग प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को नई तकनीकों का मुफ्त प्रशिक्षण दे रहा है. वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है, बल्कि खेती की लागत कम करने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी नई मजबूती मिल रही है.