नहीं थम रहे किसानों की आत्महत्या के मामले, अन्नदाता ने पेड़ से लटककर जान दी, 3 साहूकारों की तलाश
Maharashtra farmers suicide: महाराष्ट्र के लातूर में एक और किसान ने साहूकारों से परेशान होकर जान दे दी. महाराष्ट्र में लगातार किसानों की आत्महत्या की घटनाएं देखी जा रही हैं. इस साल जनवरी से जून तक 6 महीने में 880 किसानों ने आत्महत्या की है. यह आंकड़े बताते हैं कि अन्नदाता किस कदर मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान है.
महाराष्ट्र में आत्महत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 तक 880 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. अब लातूर में गुरुवार को एक और किसानों ने आम के पड़े से लटककर अपनी जान ले ली. मामले में आरोपी 3 साहूकारों की पुलिस तलाश कर रही है. मृतक किसान के परिजनों ने साहूकारों पर कर्ज का ब्याज चुकाने को लेकर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है.
महाराष्ट्र के लातूर जिले में बृहस्पतिवार को 45 वर्षीय एक किसान ने कथित तौर पर तीन साहूकारों के उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली. स्थानीय पुलिस को दी गई मृतक किसान के परिजनों की ओर से बताया गया है कि उदगीर तहसील के हंदर्गुली गांव निवासी रामदास शिवाजी बोलेगावे का शव सुबह करीब साढ़े छह बजे मोरतलवाडी जाने वाली सड़क पर स्थित उनके खेत में आम के पेड़ से लटका मिला.
ब्याज के पैसों के लिए किसान को धमकाते थे साहूकार
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार वाढवना पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार हल्ली गांव के निवासी आरोपी विक्रम उर्फ जंटू राजपाल माने, जीवन चंद्रकांत माने और चंद्रकांत माने ने किसान रामदास शिवाजी बोलेगावे को ब्याज पर पैसे उधार दिए थे. मृतक के भाई की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि आरोपी तीनों साहूकार कर्ज की वसूली के लिए उसके भाई को लगातार परेशान कर रहे थे और धमकी दे रहे थे, जिससे तंग आकर उसने खुदकुशी कर ली.
तीनों साहूकार फरार, पुलिस की तलाश जारी
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 351(2) (आपराधिक धमकी) और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. तीनों साहूकार फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है. मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
हर दिन 2 किसान आत्महत्या कर रहे – सरकारी आंकड़े
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का यह कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है. पीटीआई के अनुसार सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से जून तक 6 महीने के दौरान मराठवाड़ा और अमरावती में 880 किसानों ने अपना जीवन खत्म कर लिया. जून महीने 82 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान दी, जो हर दिन दो मौतों की संख्या से भी ज्यादा है.
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अमरावती संभाग में जनवरी में 62, फरवरी में 64, मार्च में 68, अप्रैल में 76, मई में 63 और जून में 82 किसानों ने आत्महत्या की. जनवरी से जून की अवधि में यवतमाल में सबसे अधिक 128 किसानों ने जान दी. इसके बाद अकोला में 80, अमरावती में 76, बुलढाणा में 69 और वाशिम में 62 किसानों ने अपनी जीवन समाप्त कर लिया.