छत्तीसगढ़ में धान घोटाले का खुलासा, अब तक 4 FIR दर्ज.. कलेक्टर के आदेश के बाद कार्रवाई शुरू

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में धान खरीद प्रक्रिया में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर मिला है. प्रशासन ने अब तक चार FIR दर्ज की हैं और दावा किया है कि कार्रवाई से 400 करोड़ रुपये की बचत हुई. अब इस मामले को पूरे क्षेत्र में जांच के लिए बढ़ाया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 28 May, 2026 | 05:14 PM

Paddy Purchase: छत्तीसगढ़ में हर साल धान की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार सामने आई गड़बड़ियों ने सहकारी समितियों, प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव के नेतृत्व में की गई जांच और निरीक्षण के दौरान कई सहकारी समितियों में वित्तीय और स्टॉक से जुड़ी बड़ी अनियमितताएं मिलीं. जांच में रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर सामने आया, जिसके बाद जिम्मेदार समितियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. वहीं, अब तक 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं.

कलेक्टर जितेंद्र यादव ने कहा कि तकनीक और सख्त जांच के जरिए धान खरीद और तौल प्रक्रिया में हो रही बड़ी गड़बड़ियों का पता लगाया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से इस साल करीब 400 करोड़ रुपये की बचत हुई है. साथ ही, धान कमी घोटाले  में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक चार FIR भी दर्ज की जा चुकी हैं. एक स्थानीय सूत्र ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि इस साल की खरीद के आंकड़े सिर्फ चौंकाने वाले नहीं, बल्कि बेहद संदिग्ध हैं. उनका कहना है कि अगर सभी समितियों की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाए, तो सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला सामने आ सकता है.

लगातार गड़बड़ियां हो रही थीं

धान खरीद व्यवस्था से जुड़े सूत्रों के अनुसार सिस्टम में कई कमजोर जगहों पर लगातार गड़बड़ियां हो रही थीं, जिन्हें अब पकड़कर बंद किया गया है. इसमें तौल के दौरान हेराफेरी, परिवहन और भंडारण की खराब निगरानी के कारण धान का रिकॉर्ड  से गायब होना और सिर्फ कागजों में मौजूद धान के फर्जी डिजिटल व मैनुअल रिकॉर्ड तैयार करना शामिल था.

सुधार की दिशा में बड़ा मॉडल पेश

अधिकारियों के मुताबिक, राजनांदगांव में प्रशासन की सख्ती और निगरानी के कारण धान खरीद घोटाले का खुलासा हो सका. आंतरिक ऑडिट के दौरान करोड़ों रुपये के संभावित धान खरीद घोटाले का पता चला. कलेक्टर की निगरानी में जिला प्रशासन ने डेटा मिलान अभियान चलाया, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक खरीद में बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं. अब इस जांच प्रक्रिया  को पूरे क्षेत्र में लागू करने की तैयारी की जा रही है. नीति विशेषज्ञ इस कार्रवाई को सुधार की दिशा में बड़ा मॉडल मान रहे हैं. वहीं, विपक्षी दल और किसान संगठन कथित धान कमी घोटाले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं.

3100 रुपये क्विंटल धान की खरीदी

बता दें कि इस साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान किसानों के लिए बड़ी घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि किसानों को धान का कुल 3100 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान किया जाएगा. इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अलावा 731 रुपये बोनस भी शामिल है. यह राशि किसानों को कृषक उन्नति योजना के तहत दी जाएगी. इसका लाभ सिर्फ उन किसानों को मिलेगा, जिन्होंने धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. सरकार के इस फैसले से राज्य के 25 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा होगा.

Published: 28 May, 2026 | 05:10 PM

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