छत्तीसगढ़ में धान बुवाई 80 फीसदी पूरी, विपरीत मौसम किसानों के लिए चुनौती.. उपज घटने की चिंता

Paddy sowing in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में धान मुख्य फसल है, लेकिन इस बार कम बारिश की चिंताओं के बीच किसानों को मक्का, दलहन फसलों में चना, तिवड़ा और तिलहन फसलों की खेती भी बढ़ाई गई है.

नोएडा | Published: 9 Aug, 2026 | 05:27 PM

छत्तीसगढ़ में धान रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली है. 7 दिन पहले शुरू हुई धान की बुवाई करने वाले किसान कम बारिश को लेकर चिंतित हैं. रांची मौसम केंद्र के अनुसार राज्य में अब तक 70 फीसदी बारिश हो चुकी है. अगस्त से सितंबर तक अल नीनो के और मजबूत होने की आशंकाओं ने बारिश कम होने की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में धान की खेती पर निर्भर रहने वाले किसानों को उत्पादन घटने की चिंता सता रही है. वहीं, अधिकारी किसानों को किसी भी नुकसान से बचने के लिए फसल बीमा कराने की सलाह दे रहे हैं.

अब तक 70 फीसदी बारिश, धान समेत खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी

छत्तीसगढ़ को देश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है. यहां की लगभग 70% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. बुवाई और मानसूनी प्रगति इस खरीफ सीजन में लगभग 48 से 49 लाख हेक्टेयर में बोनी का लक्ष्य रखा गया है. हालिया अच्छी बारिश के कारण बोनी का काम तेजी से आगे बढ़ा है. इसके साथ ही खरीफ सीजन की बोनी ने तेजी पकड़ ली है, जो लक्ष्य का लगभग 80 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है.

फसल बीमा के लिए घटती रुचि बनी चिंता का कारण

राज्य के कुछ जिलों में फसल बीमा के प्रति घटता रुझान और वर्षा पर निर्भरता जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. लेकिन, ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे किसानों को फसल बीमा कराने के लिए प्रेरित करें और उन्हें बताएं की बारिश कम होने की स्थिति में अगर फसल खराब होती है तो उनको होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकेगी और किसानों को आर्थिक संकट से बचाया जा सकेगा.

9 लाख मीट्रिक टन खाद और 4 लाख क्विंट से ज्यादा बीज वितरित

राज्य के कृषि विभाग के अनुसार किसानों को खाद और बीज का वितरण सुचारू रूप से जारी है. किसानों को सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से उन्नत बीज और रासायनिक के साथ-साथ नैनो उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है. किसानों को 9.25 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.15 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है. बीज निगम ने इस साल 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है. राज्य में जरूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में उर्रवकों का स्टॉक मौजूद है. सरकारी बयान में कहा गया है कि खाद बीज की कहीं भी कोई दिक्कत नहीं है.

मक्का, चना और तिलहन फसलों की खेती भी की गई

छत्तीसगढ़ में धान मुख्य फसल है, लेकिन इस बार कम बारिश की चिंताओं के बीच किसानों को मक्का, दलहन फसलों में चना, तिवड़ा और तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया है. राज्य में सिंचाई क्षमता का विस्तार कर इसे लगभग 21.76 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है, ताकि किसानों को विपरीत स्थिति में पानी उपलब्ध कराया जा सके.

बारिश में सुधार से खरीफ बुवाई का टारगेट पूरा होने की उम्मीद

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एग्रोनामी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्राकर ने जारी बयान में कहा कि जून के शुरूआती दौर में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बोनी प्रभावित हुई थी, लेकिन जुलाई माह में अच्छी बारिश होने के बाद बोनी कार्य में कुछ सुधार भी आया है. राज्य के लगभग 34 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य की 70 प्रतिशत खरीफ की बोनी हो चुकी है. चालू खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य है.

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