धान के साथ मेड़ पर बोएं अरहर, एक ही खेत से होगी डबल कमाई! जानें बुवाई का सही तरीका
धान की खेती करने वाले किसान खेत की मेड़ को खाली छोड़ने के बजाय यहां अरहर की बुवाई कर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही दूरी, उपयुक्त मिट्टी और समय पर बुवाई से कम अतिरिक्त खर्च में अच्छी पैदावार मिल सकती है.
Paddy Farming: खरीफ सीजन में किसान धान की खेती के साथ खेत की मेड़ का भी बेहतर इस्तेमाल कर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं. मेड़ पर अरहर की खेती ऐसा ही विकल्प है, जिसमें मुख्य फसल के साथ दूसरी फसल तैयार की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही दूरी और उचित देखभाल के साथ मेड़ पर अरहर उगाने से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है.
धान के साथ अरहर की खेती क्यों है फायदेमंद?
खरीफ सीजन में ज्यादातर किसान अपने खेत में धान की खेती करते हैं, लेकिन खेत की मेड़ का हिस्सा अक्सर खाली रह जाता है. इस खाली जगह का इस्तेमाल अरहर की खेती के लिए किया जा सकता है. इससे एक ही खेत से दो फसलों का लाभ लेने का मौका मिलता है और किसान की अतिरिक्त आमदनी बढ़ सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मेड़ पर अरहर की बुवाई करने से धान की मुख्य फसल के उत्पादन पर खास असर नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों फसलों को अलग-अलग जगह मिलती है. इसके अलावा धान की खेती के दौरान खेत में डाली जाने वाली खाद और पोषक तत्वों का कुछ लाभ अरहर के पौधों को भी मिल जाता है. इससे अलग से इनपुट पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है.
मानसून शुरू होते ही करें बुवाई
अरहर की बुवाई के लिए मानसून की शुरुआत का समय बेहतर माना जाता है. खेत की मेड़ पर बुवाई करने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर लेना चाहिए. अरहर के लिए बलुई दोमट और दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है और फसल को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं. मेड़ पर अरहर की बुवाई करते समय पौधों और कतारों के बीच उचित दूरी रखना बेहद जरूरी है. पौधों के बीच करीब 20 से 30 सेंटीमीटर तथा कतारों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर दूरी रखी जा सकती है. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और हवा का संचार भी बेहतर रहता है.
कम पानी में भी तैयार हो जाती है अरहर
अरहर की खासियत यह है कि यह अपेक्षाकृत सूखा सहन करने वाली फसल है. बारिश के आधार पर भी इसकी खेती की जा सकती है. हालांकि खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है. धान के खेत की मेड़ पर अरहर लगाने का एक फायदा यह भी है कि किसान खेत की खाली जगह का इस्तेमाल कर लेते हैं. इससे बिना अलग खेत लगाए अतिरिक्त फसल प्राप्त करने की संभावना बनती है. शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण और पौधों की नियमित निगरानी करना जरूरी है, ताकि फसल का विकास बेहतर तरीके से हो सके.
इन किस्मों से मिल सकता है अच्छा उत्पादन
किसान अपनी क्षेत्रीय परिस्थितियों और उपलब्ध बीज के अनुसार अरहर की उपयुक्त किस्मों का चयन कर सकते हैं. अमर, आजाद, नरेंद्र अरहर-1, नरेंद्र अरहर-2, पीडीए-11 और मालवीय विकास जैसी किस्मों की खेती की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अनुकूल मौसम, अच्छी मिट्टी, उचित दूरी और बेहतर प्रबंधन मिलने पर अरहर से करीब 25 से 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन की संभावना रहती है. हालांकि वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है. ऐसे में धान के साथ मेड़ पर अरहर की खेती किसानों के लिए कम अतिरिक्त खर्च में अतिरिक्त उत्पादन और आमदनी का बेहतर विकल्प बन सकती है.