फसल खरीद बंद पर किसानों को अब तक नहीं मिले पैसे, 368 करोड़ के भुगतान का इंतजार

कर्नाटक के तमकुरु जिले में रागी खरीद के बाद भी किसानों को 368 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है. MSP बढ़ने के बावजूद 56,991 किसानों में से हजारों को समय पर पैसा नहीं मिला है. बोरियों की कमी और देरी से खरीदी प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी. किसान बारिश के बीच बुवाई के लिए कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 9 Jun, 2026 | 02:39 PM

Ragi Purchase: भले ही केंद्र और राज्य सरकारें मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन किसानों को फसल खरीदी  के बाद समय पर भुगतान नहीं हो रहा है. ऐसे में किसानों का गुस्सा सरकारी व्यवस्था के प्रति बढ़ता ही जा रहा है. लंबित भुगतान का ताजा मामला कर्नाटक के तमकुरु जिले में सामे आया है, जहां रागी की MSP पर खरीद प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन किसानों के खातों में अब तक भुगतान राशि नहीं पहुंची है. जिले के किसानों को पिछले 2 महीने से 368 करोड़ रुपये के भुगतान का इंतजार है.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में रागी की खरीदी  जनवरी में शुरू होकर मार्च तक पूरी होनी थी, लेकिन बोरियों की कमी के कारण इसमें देरी हुई. ऐसे में खरीद प्रक्रिया मई के अंत तक चलती रही. खास बात यह है कि रागी खरीदी के लिए जिले में 10 क्रय केंद्र बनाए गए थे, जहां  56,991 किसानों ने 12.95 लाख क्विंटल रागी बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 54,025 किसानों से 12.32 लाख क्विंटल रागी की खरीद की गई. इसके बदले किसानों को कुल 602.20 करोड़ रुपये का भुगतान होना है, लेकिन अभी तक सिर्फ 233.37 करोड़ रुपये ही 19,585 किसानों के खातों में पहुंचे हैं. जबकि करीब 368 करोड़ रुपये का भुगतान 34,440 किसानों को अभी भी नहीं मिला है.

15 दिनों के भीतर भुगतान का आश्वासन

अधिकारियों ने पहले भरोसा दिया था कि खरीद के 15 दिनों के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी देरी जारी है. कई किसानों को रागी बेचने के दो महीने बाद भी पैसे नहीं मिले हैं. ऐसे इस बार रागी का MSP पिछले साल की तुलना में थोड़ी बढ़ा है. 2025 में जहां रागी का भाव 4,290 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं इस बार यह बढ़कर 4,886 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.

7,36,396 क्विंटल रागी की खरीद

खास बात यह है कि पिछले साल 46,628 किसानों से 7,36,396 क्विंटल रागी की खरीद हुई थी, जबकि इस बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों की संख्या  भी बढ़ गई है. वहीं, बेहतर दाम की उम्मीद में अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर बेचने वाले किसान अब भुगतान का इंतजार कर रहे हैं और रोजाना बैंक जाकर अपने खातों की जांच कर रहे हैं. चिक्कनायकनहल्ली तालुक में सबसे ज्यादा 120 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि कोराटागेरे खरीद केंद्र पर 70 किसानों का सिर्फ 68 लाख रुपये भुगतान बाकी है, जो जिले में सबसे कम है.

फसल बुवाई की तैयारियां शुरू

जिले में पिछले एक हफ्ते से तेज बारिश के चलते किसानों ने अब बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं. उन्हें बीज, खाद और अन्य कृषि कामों के लिए पैसों की जरूरत है, लेकिन रागी बिक्री का भुगतान समय पर नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं. कई किसान मजबूरी में कर्ज लेकर खेती के काम चला रहे हैं. जो पहले ही ऊंचे ब्याज पर कर्ज ले चुके हैं, उनके लिए उसे चुकाना और भी कठिन हो गया है.

Published: 9 Jun, 2026 | 02:34 PM

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