आदिवासी महिलाओं ने बनाया कुकीज ब्रांड, मिलेट्स उत्पादों की खूब सप्लाई.. हर महीने सवा लाख कमाई
Tribal Women Millet Cookies : जबलपुर के अलग-अलग गांवों की 90 आदिवासी महिलाओं ने मोटे अनाज से बिस्किट तैयार कर रही हैं. वे नूडल्स भी बनाकर बिक्री कर रही हैं और उनके उत्पादों की राज्य के साथ ही देश के अन्य हिस्सों से डिमांड आ रही है.
कभी स्थानीय व्यापारी आदिवासी महिलाओं से कोदो-कुटकी जैसे सुपर फूड को बेहद कम कीमत पर खरीदकर ले जाते थे, लेकिन आज वही महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर तीन गुना तक अधिक मुनाफा कमा रही हैं. ये बात है जबलपुर के चरगवां रोड स्थित करेली गांव की 90 आदिवासी महिलाओं की. इन महिलाओं ने मेहनत, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के बल पर सफलता की नई मिसाल कायम की है. आज महिलाएं महीने में 70 हजार से सवा लाख रुपए तक का कारोबार कर रहीं हैं.
आदिवासी महिलाओं ने समूह बनाकर शुरू किया कारोबार
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार जबलपुर जिले के अलग-अलग गांवों की 90 आदिवासी महिलाओं ने मोटे अनाज यानी कोदो-कुटकी, बाजरा और रागी से बिस्किट तैयार कर रही हैं. वे नूडल्स भी बनाकर बिक्री कर रही हैं. पहले वह कम दामों में बिस्किट की बिक्री करती थीं. लेकिन, फिर उन्होंने श्रीअन्न महिला मंडल समिति का गठन किया और नाबार्ड की आजीविका उद्यम विकास परियोजना के तहत कारोबार बढ़ाने के लिए लोन हासिल किया.
नाबार्ड से 10 लाख लोन लेकर मंगाई मशीनें
नाबार्ड की ओर से 10 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि इन महिलाओं के संगठन को दी गई है. इस रकम से आदिवासी महिलाओं ने ओवन, पॉलिशिंग मशीन और पैकेजिंग मशीनें खरीदीं. इसी सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए गए, जिससे महिलाएं आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर सकें. कभी जिन महिलाओं ने माइक्रोवेव, पैकेजिंग मशीन या मार्केटिंग की दुनिया की कल्पना भी नहीं की थी, वे आज उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन का पूरा प्रबंधन स्वयं संभाल रही हैं.
मिलेट्स से बिस्किट बनाती महिलाएं.
ट्रेनिंग पाकर बिस्किट और नूडल्स बना रहीं महिलाएं
नाबार्ड और जिला विकास विभाग की ओर से महिलाओं को विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण दिया गया था. महिलाओं को उत्पादन, मार्केटिंग और पैकेजिंग की तीन प्रमुख ट्रेनिंग दी गईं. महिलाओं को मिलेट्स की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की बारीकियां सिखाई गईं. उन्हें कच्चे मिलेट्स को पॉलिश कर आकर्षक पैकिंग में बाजार तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया गया. इसके साथ ही मिलेट्स से नूडल्स और कुकीज जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बनाना भी सिखाया गया.
हर महीने सवा लाख का कारोबार कर रहीं महिलाएं
अब ये महिलाएं केवल कोदो-कुटकी की पैकेजिंग ही नहीं कर रहीं, बल्कि रागी, कोदो और कुटकी जैसे मिलेट्स से स्वादिष्ट कुकीज और नूडल्स जैसे खाद्य उत्पाद इंदौर, भोपाल, छिंदवाड़ा और जबलपुर में भी सप्लाई कर रही हैं. इन महिलाओं ने मिलकर श्रीअन्न महिला मंडल समिति नाम से अपना ब्रांड स्थापित किया है. पहले जहां महिलाएं अपना उत्पाद बिचौलियों को कम कीमत पर बेचने को मजबूर थीं, वहीं अब वे बेहतर कमाई कर रही हैं. आज महिलाएं महीने में 70 हजार से सवा लाख रुपए तक का कारोबार कर रहीं हैं.