Ganga Flood: पटना में गंगा का रौद्र रूप! 12 जिलों में बढ़ी बाढ़ की चिंता, फसल बीमा पर CM का जोर

Ganga Flood: बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से 12 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. पटना के गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर पहुंचकर 2016 का रिकॉर्ड तोड़ चुका है. हाजीपुर और आरा के कई इलाकों में पानी घुस गया है, जबकि सारण में बांध टूटने से गांव प्रभावित हुए हैं.

नोएडा | Published: 6 Sep, 2026 | 09:34 AM

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से 12 जिलों में नए इलाकों में पानी फैल रहा है. तटबंधों पर भी दबाव बढ़ गया है. पटना के गांधीघाट पर गंगा ने 2016 में दर्ज अपने सबसे ऊंचे जलस्तर का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. शनिवार को यहां गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर पहुंच गया, जबकि 2016 में यह 50.52 मीटर था. रविवार को जलस्तर 50.62 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है.

गंगा ने तोड़ा 10 साल पुराना रिकॉर्ड

पटना के गांधीघाट पर गंगा का पानी खतरे के निशान से 183 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है. जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. मुख्यमंत्री ने पटना में शहरी सुरक्षा तटबंध और उसके आसपास के इलाकों पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार के प्रभारी मंत्रियों और अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है.

हाजीपुर और आरा के कई इलाकों में घुसा पानी

गंगा के उफान का असर अब शहरों तक पहुंच गया है. हाजीपुर के आठ वार्डों में बाढ़ का पानी भर गया है. वहीं आरा शहर के छह वार्ड भी जलमग्न हो चुके हैं. कई जगहों पर लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. सारण जिले में भी हालात बिगड़ गए हैं. दिघवारा प्रखंड की त्रिलोकचक पंचायत के केशरपुर गांव के पास माही नदी का बांध करीब 25 से 30 फीट की चौड़ाई में टूट गया. इसके अलावा दरियापुर में मठिया के पास सुखमयी नदी का बांध टूटने से आसपास के गांवों में पानी फैल गया. हाजीपुर-महनार रोड पर नयागंज और हसनपुर पलवैया के पास पानी आ जाने से यातायात प्रभावित हुआ है. महात्मा गांधी सेतु से कोनहाराघाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर भी बाढ़ के पानी ने रास्ता रोक दिया है.

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

गंगा के अलावा सोन, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, घाघरा और बागमती नदियों का जलस्तर भी कई जगहों पर लाल निशान से ऊपर पहुंच गया है. भोजपुर के बड़हरा और शाहपुर समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है. सरैया-आरा मुख्य मार्ग पर भी कई जगह पानी चढ़ गया है. इससे ग्रामीण और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों और तटबंधों पर लगातार नजर रखी जा रही है.

NDRF-SDRF की 34 टीमें संभाल रहीं मोर्चा

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए NDRF की 7 और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं. लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाने और प्रभावित इलाकों में आने-जाने के लिए 858 नावें चलाई जा रही हैं. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 50 मेडिकल कैंप और 36 पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं. वहीं, 19 बोट एंबुलेंस के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था की गई है.

मुख्यमंत्री ने की बाढ़ की समीक्षा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. उन्होंने भागलपुर के नवगछिया में राघोपुर तटबंध का निरीक्षण किया. इसके बाद बेगूसराय में बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया जिलों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने एरियल सर्वे के जरिए भी बाढ़ की स्थिति देखी. बैठक में तीनों जिलों के जिलाधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित पंचायतों, नगर निकायों, राहत शिविरों, नावों, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा व्यवस्था और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी दी.

किसानों के लिए फसल बीमा पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को फसल बीमा का लाभ जरूर मिले और कोई भी पात्र किसान इससे न छूटे. उन्होंने प्रभावित खेती वाले इलाकों के लिए वैकल्पिक फसलों की योजना बनाने, दूसरी फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने और बाढ़ से खेत खराब होने वाले किसानों को जरूरी मदद देने को कहा. इसके साथ ही जरूरत के हिसाब से सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाने और उन्हें 24 घंटे चलाने के निर्देश दिए गए हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीम भेजने और दियारा इलाकों में बोट एंबुलेंस की व्यवस्था करने को भी कहा गया है.

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