इंदौर डिक्लेरेशन: खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण के लिए ब्रिक्स देशों ने तैयार किया साझा कृषि एजेंडा

इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन पर इंदौर डिक्लेरेशन जारी हुआ. खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, कृषि व्यापार और टिकाऊ खेती को लेकर सदस्य देशों ने साझा रोडमैप तैयार किया.

इंदौर | Published: 13 Jun, 2026 | 11:55 PM

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन एक ऐतिहासिक इंदौर डिक्लेरेशनके साथ हुआ, जिसे वैश्विक कृषि सहयोग के नए रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घोषणापत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, कृषि व्यापार, नवाचार और जलवायुअनुकूल खेती के लिए ब्रिक्स देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

ब्रिक्स देशों की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया खाद्य असुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, भूराजनीतिक तनाव और बढ़ती कृषि लागत जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. ऐसे माहौल में दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों का एक साझा कृषि एजेंडा तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक कृषि भूमि का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व खाद्यान्न उत्पादन में भी करीब 42 प्रतिशत योगदान है. इसलिए इन देशों की नीतियों और पहलों का असर वैश्विक कृषि व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है.

इंदौर डिक्लेरेशन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके केंद्र में किसान को रखा गया है. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दुनिया को भोजन उपलब्ध कराने वाले किसानों की आय, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किए बिना खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती. इसी सोच के तहत किसान कल्याण, कृषि निवेश, तकनीक हस्तांतरण और बाजार तक पहुंच जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई.

खाद्य और पोषण सुरक्षा पर हुई खास चर्चा

बैठक में खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा पर भी व्यापक चर्चा हुई. सदस्य देशों ने माना कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है. लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है. तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ती आबादी के बीच पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. यही कारण है कि घोषणापत्र में पोषण सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.

कृषि व्यापार को लेकर सदस्य देशों में बनी सहमति

कृषि व्यापार को लेकर भी सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति बनी. ब्रिक्स देशों ने कृषि व्यापार को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. इसके साथ ही कृषि उत्पादों के आदानप्रदान में आने वाली बाधाओं को कम करने तथा बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. भारत द्वारा प्रस्तावित ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज जैसी पहलों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली.

बैठक में कृषि अनुसंधान और नवाचार को भी प्राथमिकता दी गई. सदस्य देशों ने माना कि वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब नई तकनीकें और समाधान किसानों के खेतों तक पहुंचें. इसी उद्देश्य से अनुसंधान और व्यवहारिक खेती के बीच की दूरी कम करने पर जोर दिया गया.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदौर डिक्लेरेशन भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ, समावेशी और किसानकेंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्य देशों ने केवल सहमति ही नहीं बनाई, बल्कि इस घोषणापत्र में शामिल पहलों को लागू करने के लिए भी प्रतिबद्धता व्यक्त की है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह दस्तावेज वैश्विक कृषि नीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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