घटिया सूरजमुखी खाद्य तेल बेचने पर कार्रवाई, फॉर्च्यून ब्रांड बनाने वाली कंपनी पर जुर्माना

Fortune sunflower edible oil : मानक से कम गुणवत्ता वाला सूरजमुखी खाद्य तेल बेचने पर एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस पर जुर्माना लगाया गया है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने तेल के सैंपल जांच में फेल पाए जाने पर कार्रवाई की है.

नोएडा | Published: 7 Aug, 2026 | 01:32 PM

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मानक से कम गुणवत्ता वाला फोर्टिफाइड सूरजमुखी खाद्य तेल बनाने और बेचने के मामले में खाद्य तेल कंपनी एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड पर जुर्माना लगाया है. अहमदाबाद स्थित एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड ‘फॉर्च्यून’ ब्रांड के तहत खाद्य तेल बेचती है. यह कार्रवाई नियामक की ओर से गोवा से लिए गए एक नमूने के प्रयोगशाला परीक्षण में ‘विटामिन डी’ का स्तर निर्धारित सीमा से काफी कम पाए जाने के बाद की गई है.

कम क्वालिटी वाला फोर्टिफाइड खाद्य तेल बनाने-बिक्री करने पर कार्रवाई

नियामक FSSAI ने कहा कि यह आदेश एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड (मैंगलोर) के खिलाफ मानक से कम गुणवत्ता वाला फोर्टिफाइड खाद्य तेल बनाने और विपणन करने के मामले में पारित किया गया है. प्राधिकारण ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि इस मामले में एक न्यायनिर्णयन आदेश पारित किया गया है और कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है. फोर्टिफाइड सूरजमुखी खाद्य तेल वह तेल होता है जिसमें पोषण बढ़ाने के लिए विटामिन ए और विटामिन डी जैसे अतिरिक्त पोषक तत्व मिलाए जाते हैं.

फॉर्च्यून रिफाइंड सूरजमुखी तेल सैंपल जांच में फेल

नियामक ने उल्लंघनों का विवरण साझा करते हुए बताया कि एक लीटर के फॉर्च्यून ‘फ्रायोला’ रिफाइंड सूरजमुखी तेल (सीड) FSSAI की ओर से ताज फोर्ट अगुडा रिजॉर्ट एंड स्पा गोवा से एकत्र किया गया था. प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला की जांच में पाया गया कि यह फोर्टिफाइड खाद्य तेल खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम 2018 के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा.

तेल में विटामिन ए और विटामिन डी का स्तर सीमा से कम मिला

FSSAI ने कहा कि उत्पाद में विटामिन ए और विटामिन डी का स्तर निर्धारित सीमा से कम था. इस कारण इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 3(1)(जेडएक्स) के तहत मानक से कम गुणवत्ता वाला घोषित किया गया. कंपनी की अपील पर नमूने की जांच रेफरल प्रयोगशाला में कराई गई, जिसमें भी विटामिन डी का स्तर निर्धारित सीमा से काफी कम होने की पुष्टि हुई. इसके बाद केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने अभियोजन चलाने की मंजूरी दी है. हालांकि, FSSAI ने जुर्माने की राशि का खुलासा नहीं किया है.

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