चावल घोटाला: इथेनॉल वाले सरकारी चावल को मिलों में महंगे दाम पर बेचा, 8 लाख बोरियों का सौदा
Rice Scam Haryana: इथेनॉल प्लांट ने एफसीआई कालांवाली से लगभग 5 लाख गट्टे तथा एफसीआई डबवाली से 3 लाख 67 हजार गट्टे सरकारी चावल ओएमएसएस योजना के तहत खरीदे थे. इस चावल को राइस मिलों को महंगे दाम पर बेचा गया है.
इथेनॉल बनाने के लिए सस्ती दर पर वितरित सरकारी चावल का बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है. हरियाणा के किसान संगठन बीकेई का आरोप है कि सिरसा स्थिति इथेनॉल प्लांट के संचालकों ने सरकार से इथेनॉल बनाने के लिए सस्ती पर मिले चावल को मिलों में महंगे दाम पर बेचा गया है. इसी प्लांट में इससे पहले कृषि ग्रेड खाद को टेक्निकल ग्रेड खाद के रूप में इस्तेमाल करने का मामला देखा गया है. दोनों ही मामलों पर कार्रवाई की मांग की गई है. किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि किसानों और गरीबों के हक को मारने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो इथेनॉल प्लांट के गेट पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा.
8 लाख बोरी सरकारी चावल को चीनी मिलों को बेचा
भारतीय किसान एकता (बीकेई) के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने डबवाली स्थित ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड पर ओपन मार्केटिंग सेल्स स्कीम के तहत खरीदे गए सरकारी चावल के बड़े पैमाने पर कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया. इथेनॉल प्लांट ने एफसीआई कालांवाली से लगभग 5 लाख गट्टे तथा एफसीआई डबवाली से 3 लाख 67 हजार गट्टे सरकारी चावल ओएमएसएस योजना के तहत खरीदे थे. यह चावल सरकार की नीति के अनुसार इथेनॉल उत्पादन में उपयोग किया जाना था, लेकिन आरोप है कि इसे बीच रास्ते से अवैध रूप से विभिन्न राइस मिलों में ऊंचे दामों पर सप्लाई कर दिया गया.
सरकार ने 2320 रुपये में दिया था, बेचा 3000 रुपये में
लखविंदर औलख ने कहा कि सरकार की ओर से यह चावल लगभग 2320 प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराया गया था, जबकि इसे कथित रूप से 2800 से 3000 प्रति क्विंटल तक विभिन्न राइस मिलों में बेचा गया. इससे सरकारी योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ है तथा किसानों और सरकारी खजाने दोनों को नुकसान पहुंचा है.
एग्रीकल्चर ग्रेड यूरिया का घोटाला भी यहां पकड़ा गया
औलख ने आरोप लगाया कि ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी फैक्ट्री में किसानों के लिए सब्सिडी पर मिलने वाली नीम कोटेड यूरिया के कथित अवैध उपयोग के मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है, जिसकी जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यह नया मामला सरकारी चावल के कथित दुरुपयोग से जुड़ा एक और बड़ा घोटाला है. संगठन के अनुसार आने वाले समय में कंपनी से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा किया जाएगा.
किसानों के संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप
बीकेई प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि फैक्ट्री के आसपास के ग्रामीण लंबे समय से वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, भारी ट्रैफिक और किसानों के हिस्से के पानी के कथित अवैध उपयोग जैसी समस्याओं से परेशान हैं. उनका आरोप है कि एक ओर किसानों के संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है और दूसरी ओर सरकारी योजनाओं का भी कथित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि प्रशासन अब तक प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है.
हरियाणा के इथेनॉल प्लांट में चावल घोटाले का चार्ट जारी किया है.
कार्रवाई नहीं होने पर 24 जुलाई को धरना प्रदर्शन
लखविंदर सिंह औलख ने चेतावनी दी कि यदि यूरिया खाद मामले में गिरफ्तारी तथा सरकारी चावल के कथित घोटाले की जांच एवं कानूनी कार्रवाई शीघ्र शुरू नहीं की गई, तो भारतीय किसान एकता की ओर से 24 जुलाई 2026 को ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड, पन्नीवाला रूलदु स्थित इथेनॉल प्लांट का घेराव किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.