धर्मशाला में बनेगा 19 करोड़ का हाईटेक सेंटर, किसानों को मौसम-फसलों की मिलेगी सटीक जानकारी
Remote Sensing Centre: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला रिमोट सेंसिंग और डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम सेंटर बनाया जाएगा. इससे मौसम, जमीन और फसलों की डिजिटल जानकारी मिलेगी और किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह देने में मदद होगी.
Dharamshala Remote Sensing Centre: हिमाचल प्रदेश में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. राज्य का पहला रिमोट सेंसिंग और डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम सेंटर धर्मशाला में बनाया जाएगा. इस सेंटर पर करीब 19 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने शनिवार को धर्मशाला में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान इसकी जानकारी दी. सरकार के मुताबिक, इस हाईटेक सेंटर की मदद से मौसम, जमीन, फसलों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा डिजिटल डेटा तैयार किया जाएगा. इसका इस्तेमाल अलग-अलग सरकारी विभागों के साथ-साथ किसानों के लिए भी किया जा सकेगा.
मौसम और फसल की जानकारी से किसानों को होगा फायदा
इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि, यहां सैटेलाइट और दूसरी आधुनिक तकनीकों के जरिए कृषि से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी. इससे मौसम और फसलों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. मौसम में बदलाव, जमीन की स्थिति और फसल से जुड़ी जानकारी पहले मिलने पर किसान खेती से जुड़े फैसले ज्यादा बेहतर तरीके से ले सकेंगे. मंत्री ने कहा कि इससे सरकारी कामकाज भी ज्यादा तकनीक आधारित, पारदर्शी और तेज हो सकेगा. सेंटर को केंद्र सरकार के सहयोग से विकसित किया जाएगा.
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और बागवानी की बड़ी भूमिका है. राज्य की बड़ी आबादी खेती-किसानी और इससे जुड़े कामों पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर है. ऐसे में किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. सरकार राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्टअप योजना के जरिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है. प्राकृतिक तरीके से उगाए जाने वाले गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है.
वहीं मक्के का समर्थन मूल्य 50 रुपये प्रति किलो और कच्ची हल्दी का 150 रुपये प्रति किलो किया गया है. सरकार का जोर किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ लाने के साथ-साथ उनकी उपज को बेहतर दाम दिलाने पर भी है.
250 करोड़ रुपये से बनेगा आधुनिक मिल्क प्लांट
हिमाचल में डेयरी सेक्टर को आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम चल रहा है. कांगड़ा जिले के धगवार में करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मिल्क प्लांट बनाया जा रहा है. दूध उत्पादकों को बेहतर कीमत दिलाने के लिए खरीद मूल्य भी तय किया गया है. गाय के दूध के लिए 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 71 रुपये प्रति लीटर का खरीद मूल्य निर्धारित किया गया है. इससे डेयरी से जुड़े किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सात जिलों में बढ़ेगी फल की खेती
फल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए HP SHIVA प्रोजेक्ट भी सात जिलों में लागू किया जा रहा है. परियोजना के पहले चरण में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था. इसमें से अब तक 2,612 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है. इस परियोजना के जरिए किसानों को फल उत्पादन से जोड़ने और उनकी आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. धर्मशाला में बनने वाला नया हाईटेक सेंटर, प्राकृतिक खेती, आधुनिक डेयरी प्लांट और फल उत्पादन से जुड़ी परियोजनाएं हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में तकनीक और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं.