30 दिन में 8 बाघों की मौत पर हाईकोर्ट का सख्त कदम, 9 जुलाई को केंद्र और राज्य पेश करेंगे रिपोर्ट

Jabalpur High Court Strict on Tigers Death: मध्य प्रदेश में एक माह के भीतर 8 बाघों की मौत के मामले को जबलपुर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है.

नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 03:15 PM

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर में रिजर्व एक महीने के भीतर 8 बाघों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इन मामलों पर दिखाई जा रही सुस्ती पर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार से रिपोर्ट तलब की है. हाईकोर्ट ने बाघों की सुरक्षा, संक्रमण रोकथाम के प्रयासों और उपचार संबंधी विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है. अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की गई है. वन्यजीव प्रेमियों की निगाहें अब इन रिपोर्ट पर टिकी हैं.

मध्य प्रदेश में बाघों की की मौत के मामले में शुरुआती रिपोर्ट में बाघों की मौत का कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) को बताया गया. यह वायरस अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा होता है और इसके फैसले का सोर्स कुत्तों को माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस से ग्रसित होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है. इसलिए पिल्लों का समय पर टीकाकरण और बचाव ही इससे बचने का एकमात्र सबसे प्रभावी तरीका है. ऐसे में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इस वायरस की रोकथाम के प्रयासों के बारे में जानकारी मांगी है.

9 जुलाई को अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर 8 बाघों की मौत के मामले को जबलपुर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है. जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा, संक्रमण की रोकथाम और उपचार संबंधी उपायों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी और तब रिपोर्ट पेश करनी होगी.

बाघ अमूल्य धरोहर हैं और लापरवाही मिली तो जिम्मेदार गंभीर नतीजे भुगतेंगे

न्यायमूर्ति आनंद पाठक और बीपी शर्मा की युगलपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि संक्रमण के संभावित स्रोत माने जा रहे आवारा और घरेलू कुत्तों को क्वारंटीन करने सहित अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि बाघ देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या निर्धारित मानकों के पालन में कमी पाई जाती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा.

केंद्र और राज्य की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि संक्रमण रोकने, वन्यजीवों की चिकित्सकीय निगरानी, संभावित संक्रमित पशुओं की पहचान और रिजर्व क्षेत्र में जैव-सुरक्षा मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. अब वन्यजीव प्रेमियों समेत सबकी निगाहें केंद्र और राज्य सरकार की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कान्हा में बाघों की मौतों को रोकने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है.

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