फसल बीमा प्रीमियम और भुगतान के आंकड़े में गड़बड़ी से फंसी सरकार, 1500 करोड़ के अंतर ने खोली पोल
Maharashtra crop insurance : कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने विधानसभा को बताया कि पीएम फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों को लगभग 6,944.11 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जबकि विधान परिषद में पेश किए गए लिखित जवाब में इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा अलग बताया गया है.
महाराष्ट्र कृषि विभाग ने राज्य विधानसभा में फसल बीमा के अलग-अलग आंकड़े दिए हैं, जिससे मामला सियासी रंग लेता दिख रहा है. राज्य सरकार पहले ही किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर विपक्ष के सवाल झेल रही है और अब फसल बीमा के आंकड़ों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. फसल बीमा के लिए बीमा कंपनियों को मिले प्रीमियम और किसानों को भुगतान रकम आंकड़ा 2016 से 2024-25 के बीच का है. मामले में कृषि विभाग फिर से मूल्यांकन और आंकड़ों में गड़बड़ी को देखने में जुट गया है.
महाराष्ट्र सरकार 56 लाख किसानों की कर्जमाफी में लगाई गई शर्तों के चलते विरोध का सामना कर रही है. अब कृषि विभाग ने पीएम फसल बीमा के प्रीमियम और भुगतान के गलत आंकडे़ पेशकर विपक्ष को बखिया उधेड़ने का एक और मौका दे दिया है. महाराष्ट्र कृषि विभाग ने राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में जमा किए गए लिखित जवाबों में फसल बीमा के पैसों से जुड़े बहुत अलग-अलग आंकड़े दिए हैं, जिससे हैरानी हो रही है.
बीमा कंपनियों के नेट प्रॉफिट आंकड़ों में 1500 करोड़ का अंतर
पीटीआई की रिप्रोट के अनुसार कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने विधानसभा को बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों को लगभग 6,944.11 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जबकि विधान परिषद में पेश किए गए लिखित जवाब में इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा लगभग 8,516.97 करोड़ रुपये बताया गया, जिससे 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का अंतर दिखता है.
विधान परिषद में पेश की गई रकम ज्यादा रही
कृषि मंत्री की ओर से पेश किए गए ये अलग-अलग आंकड़े फसल बीमा योजना को लागू करने और बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति के बारे में अलग-अलग ‘तारांकित सवालों’ (starred questions) के लिखित जवाबों में सामने आए हैं. विधान परिषद में भरणे ने सोमवार को बताया कि 2016 से 2024-25 तक बीमा कंपनियों को योजना के तहत कुल 52,563.22 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिला, जबकि किसानों को 37,625.69 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया.
उन्होंने बताया कि चूंकि राज्य सरकार ने 2022 से बीमा कंपनियों के लाभ को कुल प्रीमियम के 20 फीसदी तक सीमित कर दिया था, इसलिए बीमा कंपनियों ने 8,516.97 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया और अतिरिक्त प्रीमियम के तौर पर 5,583.03 करोड़ रुपये राज्य सरकार को वापस किए.
विधानसभा में पेश आंकड़े अलग पाए गए
गुरुवार को विधानसभा में पेश किए गए एक लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि बीमा कंपनियों को 2016 और 2025-26 के बीच कुल 55,426 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिला, जबकि किसानों को दिया गया मुआवजा 39,918.55 करोड़ रुपये था. उसी जवाब में कहा गया कि लाभ की सीमा लागू होने के बाद बीमा कंपनियों ने 6,944.11 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया और इसी तरह राज्य सरकार को 5,583.03 करोड़ रुपये वापस किए.
मौजूदा खरीफ सीजन के मुआवजे में भी अंतर मिला
दोनों जवाबों में मौजूदा खरीफ सीजन के तहत मुआवजे को लेकर भी अंतर पाया गया. दोनों जवाबों में यह बात मानी गई कि फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी की शिकायतें कुछ हद तक सही हैं और यह भी बताया गया कि तालुका, जिला, डिवीजन और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण समितियां काम कर रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय टेंडर प्रक्रिया के जरिए चुनी गई बीमा कंपनियां स्कीम के नियमों के अनुसार री-इंश्योरेंस (पुनर्बीमा) करती हैं. उन्होंने कहा कि जहां भी आंकड़ों में गड़बड़ी दिख रही है उन्हें फिर से मूल्यांकन कराया जा रहा है.