Monsoon Forecast: इस बार मानसून पड़ सकता है कमजोर, जून में गर्मी और सूखे जैसी स्थिति का खतरा
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. इसके साथ ही कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप भी बढ़ने की संभावना जताई गई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में कम बारिश और अधिक तापमान का असर खेती, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है.
IMD monsoon forecast: देश में मानसून का इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए मौसम विभाग ने नया पूर्वानुमान जारी किया है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. इसके साथ ही कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप भी बढ़ने की संभावना जताई गई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में कम बारिश और अधिक तापमान का असर खेती, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है.
हालांकि मानसून की शुरुआत सामान्य समय से पहले हुई है, लेकिन पूरे सीजन के दौरान बारिश का वितरण समान नहीं रहने की संभावना है. ऐसे में किसानों को फसल प्रबंधन और सिंचाई की बेहतर योजना बनाने की सलाह दी जा रही है.
सामान्य से कम रह सकती है मानसूनी बारिश
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, जून से सितंबर के मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है. मौसम मॉडल में चार प्रतिशत तक की त्रुटि की संभावना भी बताई गई है.
इसका मतलब यह है कि देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. विशेष रूप से मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र, उत्तर-पश्चिम भारत और मानसून कोर जोन में औसत से कम वर्षा होने की संभावना है. यह स्थिति खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास पर असर डाल सकती है.
जून–सितंबर, 2026 के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की ऋतुनिष्ठ वर्षा के लिए अद्यतन/अपडेटेड दीर्घावधि पूर्वानुमान:
क) मात्रात्मक रूप से, पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ऋतुनिष्ठ वर्षा, दीर्घावधि औसत (एलपीए/LPA) का 90% होने की संभावना है, जिसमें ±4% की मॉडल त्रुटि हो सकती है।… pic.twitter.com/uyl37chdaZ
— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 29, 2026
जून में कई इलाकों में बारिश की कमी
मौसम विभाग का अनुमान है कि जून महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है. कुल वर्षा 92 प्रतिशत से कम रहने की संभावना जताई गई है. हालांकि उत्तर-पूर्व भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. लेकिन अधिकांश राज्यों को बारिश के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की शुरुआत के दौरान यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसानों को धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
कई राज्यों में बढ़ेगा लू का खतरा
मौसम विभाग ने जून में तापमान सामान्य से अधिक रहने की चेतावनी भी दी है. दिन और रात दोनों समय का तापमान कई क्षेत्रों में औसत से ज्यादा रहने की संभावना है. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से अधिक लू वाले दिन दर्ज किए जा सकते हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी गर्मी का असर ज्यादा रहने का अनुमान है. लगातार बढ़ती गर्मी का असर न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा बल्कि पशुपालन और कृषि गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है.
अल नीनो बढ़ा सकता है चिंता
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में तटस्थ ENSO स्थिति धीरे-धीरे अल नीनो की ओर बढ़ रही है. जून तक अल नीनो की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि जुलाई और अगस्त में इसके 90 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है. आमतौर पर अल नीनो की स्थिति भारत में मानसूनी बारिश को प्रभावित करती है और कई बार वर्षा में कमी का कारण बनती है. हालांकि भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है, जो कुछ हद तक मानसून को संतुलित रखने में मदद कर सकती है.
मानसून की शुरुआत ने बढ़ाई उम्मीद
हालांकि मौसम विभाग की रिपोर्ट में कुछ चिंताएं सामने आई हैं, लेकिन मानसून की शुरुआती प्रगति सकारात्मक मानी जा रही है. दक्षिण-पश्चिम मानसून 16 मई को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहुंच गया था, जो सामान्य तिथि से चार दिन पहले है. इसके बाद मानसून अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र तक आगे बढ़ चुका है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में इसके केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं.
किसानों को सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून के दौरान मौसम की स्थिति लगातार बदल सकती है. ऐसे में किसानों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखनी चाहिए और खेती से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए. सिंचाई व्यवस्था मजबूत करना, कम पानी वाली फसलों पर ध्यान देना और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करना इस सीजन में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
कम बारिश और अधिक गर्मी की आशंका के बीच यह मानसून किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है. हालांकि समय पर तैयारी और सही रणनीति से संभावित चुनौतियों का सामना किया जा सकता है.