भाकियू (मान) ने CM सैनी को PM मोदी के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा- ट्रेड डील से किसानों को नहीं होगा नुकसान
भारतीय किसान यूनियन (मान) ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन सौंपकर कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों के हित सुरक्षित हैं. संगठन ने इथेनॉल कंपनियों को किसानों से सीधे फसल खरीदने की अनुमति देने की मांग की. 4 अगस्त को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी किसानों के मुद्दों पर चर्चा होगी.
भारतीय किसान यूनियन (मान) के प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा. संगठन ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे. साथ ही कुछ किसान संगठनों पर इस मुद्दे को लेकर अफवाह फैलाने और किसानों को आंदोलन के लिए उकसाने का आरोप लगाया.
भारतीय किसान यूनिन मान के पूर्व हरियाणा प्रेसिडेंट गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया को बताया कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल 4 अगस्त को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से नई दिल्ली स्थित कृषि मंत्रालय में मुलाकात करेगा. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद सरदार भूपेंद्र सिंह मान करेंगे. संगठन ने कहा कि बैठक में किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए जाएंगे. इनमें गन्ना, मक्का, चावल, पराली और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल बनाने को बढ़ावा देने की मांग भी शामिल होगी. भाकियू (मान) का कहना है कि इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, आय के नए स्रोत बनेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री से की ये मांग
भारतीय किसान यूनियन (मान) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि इथेनॉल कंपनियों को किसानों से सीधे फसल खरीदने की अनुमति दी जाए. संगठन का कहना है कि इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी. भाकियू (मान) ने कहा कि गन्ना, मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने से किसानों की आय बढ़ेगी और उन्हें अपनी फसल बेचने का एक नया और बेहतर बाजार मिलेगा.
फरवरी 2026 में एक अहम व्यापार समझौता हुआ
बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2026 में एक अहम व्यापार समझौता हुआ है. यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारतीय कारोबार और निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इस समझौते के बाद भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पहले से बेहतर और रियायती पहुंच मिलेगी.अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है. ऐसे में इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को करीब 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में लंबे समय तक बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है.
विदेशी आयात के लिए कोई अतिरिक्त रियायत नहीं
साथ ही इस समझौते से मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे (नट्स) और प्रोसेस्ड फूड जैसे कई कृषि एवं खाद्य उत्पादों को जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा, जिससे इनका निर्यात और बढ़ सकता है. वहीं डेयरी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. इन क्षेत्रों में विदेशी आयात के लिए कोई अतिरिक्त रियायत नहीं दी गई है, जिससे भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हित सुरक्षित रहेंगे. हालांकि, इसके बावजूद कई किसान संगठन सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.