बिहार का ‘ब्लैक डायमंड’ बना दुनिया का पसंदीदा सुपरफूड! 5 साल में उत्पादन 3 गुना, विदेशों में भारी मांग

Bihar Makhana Production: मखाना अब सिर्फ व्रत में खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं रहा. बिहार में बड़े पैमाने पर होने वाली इसकी खेती ने इसे किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है. भारत दुनिया का 90 फीसदी मखाना पैदा करता है और इसकी मांग अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों में तेजी से बढ़ रही है.

नोएडा | Published: 22 Jun, 2026 | 09:01 AM

Makhana Export: भारत में मखाना सदियों से खाने और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है, लेकिन अब यह सिर्फ एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं रह गया है. आज मखाना दुनिया भर में एक सुपरफूड के रूप में अपनी पहचान बना चुका है. इसकी बढ़ती मांग और ऊंची कीमतों के कारण इसे अब ‘ब्लैक डायमंड’ यानी काला हीरा भी कहा जाने लगा है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस. के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, दुनिया में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90 फीसदी हिस्सा अकेले भारत में होता है और इसमें बिहार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.

बिहार बना मखाना उत्पादन का केंद्र

मखाना उत्पादन में बिहार का दबदबा लगातार बढ़ रहा है. राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र के कई जिले इसकी खेती के लिए प्रसिद्ध हैं. दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल और किशनगंज जैसे जिले देश के प्रमुख मखाना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं.

इसके साथ ही पिछले पांच सालों में मखाना उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

साल मखाना उत्पादन
2020 6,700 MT
2021 9,320 MT
2022 14,500 MT
2023 20,080 MT
2024 25,130 MT (39 फीसदी CAGR वृद्धि)
2025 (जनवरी-अक्टूबर) 18,150 MT

विदेशों में बढ़ी भारतीय मखाना की मांग

मखाना अब केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोप के कई देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे पौष्टिक स्नैक के रूप में पसंद कर रहे हैं. पिछले कुछ सालों में मखाना निर्यात में चार गुना तक बढ़ोतरी देखी गई है.

भारतीय मखाना के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं:

मखाना बना करोड़ों का कारोबार

डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार, मखाना अब सिर्फ एक पारंपरिक खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता हुआ एक बड़ा कारोबार बन चुका है. हेल्दी स्नैक के रूप में इसकी बढ़ती लोकप्रियता, बेहतर पैकेजिंग और विदेशों में बढ़ती मांग ने इसके बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.

बाजार से जुड़े प्रमुख आंकड़े डिटेल्स
2025 में भारतीय मखाना बाजार का आकार 929 करोड़ रुपये
2034 तक अनुमानित बाजार आकार 1,995 करोड़ रुपये
सालान ग्रोथ रेट (CAGR) 8.85 फीसदी
2029-30 तक संभावित बाजार 11,000-12,000 करोड़ रुपये
2020-22 में औसत कीमत 500 रुपये प्रति किलोग्राम
2025 में औसत कीमत 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम
कीमत में वृद्धि 2.5 गुना

मखाना की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से हेल्दी फूड की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति के कारण आई है. अगर उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता में और सुधार होता है, तो आने वाले सालों में यह फसल किसानों के लिए और अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.

क्यों कहा जाता है सुपरफूड?

मखाना पोषक तत्वों से भरपूर होता है. मखाना को ‘सुपर फूड’ की श्रेणी में रखे जाने का कारण इसकी पोषण प्रोफाइल है:

यही वजह है कि डॉक्टर और न्यूट्रिशन विशेषज्ञ भी इसे स्वस्थ आहार का हिस्सा मानते हैं. मधुमेह के मरीजों, हृदय रोगियों और वजन नियंत्रित करने वाले लोगों के लिए मखाना एक अच्छा विकल्प माना जाता है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह पौष्टिक भोजन के रूप में उपयोगी साबित होता है.

खेती में आ रही नई तकनीक

पहले मखाना की खेती मुख्य रूप से तालाबों में होती थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे खेतों में भी इसकी खेती संभव हो गई है. इससे किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाना आसान हो गया है. इसके अलावा बीज निकालने, ग्रेडिंग करने और पॉपिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आधुनिक मशीनों का भी उपयोग बढ़ रहा है. इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है.

चुनौतियां अभी भी बरकरार

हालांकि मखाना की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसकी खेती आसान नहीं है. फल कांटेदार होते हैं और बीज निकालने की प्रक्रिया काफी मेहनत वाली होती है. कई बार किसानों को पानी में गोता लगाकर बीज इकट्ठा करने पड़ते हैं, जिससे दुर्घटना और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बने रहते हैं. इसके अलावा आधुनिक उपकरणों की कमी और तालाबों की घटती संख्या भी उत्पादन के सामने बड़ी चुनौतियां हैं.

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

आने वाले सालों में मखाना का बाजार और तेजी से बढ़ेगा. बढ़ती घरेलू मांग, निर्यात के नए अवसर और स्वास्थ्य उत्पादों की लोकप्रियता इसे किसानों के लिए एक लाभकारी नकदी फसल बना रही है. अगर खेती की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए, किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलें और ब्रांडिंग पर ध्यान दिया जाए, तो बिहार का मखाना वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकता है. मखाना आज सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि बिहार की आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनता जा रहा है.

Topics: