मक्का की कीमतें क्यों फिसल रही हैं, जानिए सप्लाई, उत्पादन और वैश्विक हालात का पूरा असर

अमेरिका जैसे बड़े उत्पादक देश में किसान अब मक्का की बजाय दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. इसकी वजह है उर्वरकों की बढ़ती लागत. अगर किसान मक्का की खेती कम करते हैं, तो उत्पादन घटेगा और इससे कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है.

नई दिल्ली | Published: 11 Apr, 2026 | 09:36 AM

corn prices: पिछले कुछ समय से मक्का (कॉर्न) की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन अब बाजार का रुख थोड़ा बदलता नजर आ रहा है. रिसर्च एजेंसी BMI की हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर मक्का की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं और आने वाले समय में इनमें और गिरावट आ सकती है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह गिरावट स्थायी नहीं है और आगे चलकर बाजार फिर पलट सकता है.

क्यों गिर रही हैं मक्का की कीमतें

मक्का की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण वैश्विक परिस्थितियों में आया बदलाव है. खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है. पहले यह डर था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए उर्वरकों की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती थीं. लेकिन अब जब तनाव कुछ कम हुआ है, तो यह खतरा भी घट गया है. इसका सीधा असर मक्का के बाजार पर पड़ा है और कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

उर्वरक आपूर्ति का बड़ा असर

मक्का जैसी फसल के लिए नाइट्रोजन उर्वरक बहुत महत्वपूर्ण होता है. जब उर्वरक की कीमतें या सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर सीधे फसल उत्पादन और बाजार पर पड़ता है.

विश्लेषकों के अनुसार, युद्धविराम के बाद उर्वरक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कम हुई है, जिससे मक्का की कीमतों में तेजी रुक गई है. लेकिन अगर भविष्य में फिर से कोई संकट पैदा होता है, तो बाजार में तेजी भी लौट सकती है.

वैश्विक बाजार में क्या है हाल

दुनिया के बड़े निर्यातक देशों में मक्का के दामों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन हल्का उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है. अर्जेंटीना में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है, वहीं ब्राजील और अमेरिका में कीमतें कुछ घटी हैं. यूक्रेन में भी हल्की बढ़त देखने को मिली है. वहीं ब्राजील में इस समय सप्लाई ज्यादा है और अमेरिका में स्टॉक भी रिकॉर्ड स्तर पर है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

उत्पादन और स्टॉक का असर

वैश्विक स्तर पर मक्का का उत्पादन भी बढ़ रहा है. 2025-26 के लिए उत्पादन का अनुमान करीब 1.32 बिलियन टन लगाया गया है, जो पिछले साल से ज्यादा है. इसके साथ ही वैश्विक स्टॉक भी बढ़कर करीब 294.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है. जब बाजार में ज्यादा माल उपलब्ध होता है, तो कीमतों पर दबाव आना स्वाभाविक है. भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में उत्पादन बढ़ने से भी बाजार में सप्लाई ज्यादा हो गई है.

क्या हो सकता है आगे

हालांकि अभी कीमतों में गिरावट के संकेत हैं, लेकिन आगे का रास्ता इतना आसान नहीं है. इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल के अनुसार, 2026-27 में मक्का उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, जबकि खपत बढ़ने की संभावना है. अगर ऐसा होता है, तो भविष्य में कीमतों में फिर तेजी आ सकती है.

किसानों के फैसले भी करेंगे असर

अमेरिका जैसे बड़े उत्पादक देश में किसान अब मक्का की बजाय दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. इसकी वजह है उर्वरकों की बढ़ती लागत. अगर किसान मक्का की खेती कम करते हैं, तो उत्पादन घटेगा और इससे कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है.

ब्राजील और चीन की भूमिका

ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा उर्वरक आयातक देश है और वह अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बाहर से मंगाता है. ऐसे में सप्लाई में कोई भी रुकावट वहां के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. वहीं चीन द्वारा फॉस्फेट निर्यात पर लगाई गई अस्थायी रोक भी वैश्विक उर्वरक बाजार को प्रभावित कर सकती है, जिससे मक्का के दामों पर असर पड़ सकता है.

Topics: