भारत के नारियल की विदेशों में बढ़ी मांग! निर्यात में 62 फीसदी का उछाल, 7,038 करोड़ रुपये पहुंचा कारोबार
Coconut Export: भारत के नारियल निर्यात में 2025-26 के दौरान 62 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई और निर्यात का मूल्य 7,038.25 करोड़ रुपये पहुंच गया. सक्रिय कार्बन सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा. इसके अलावा नारियल दूध, पाउडर और कुंवारी नारियल तेल जैसे उत्पादों की विदेशी मांग भी बढ़ी है.
India Coconut Export: भारत में नारियल का इस्तेमाल सिर्फ तेल, चटनी और खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं है. अब नारियल से तैयार होने वाले कई तरह के उत्पाद विदेशों में भी खूब पसंद किए जा रहे हैं. यही वजह है कि भारत के नारियल निर्यात में पिछले साल बड़ी तेजी देखने को मिली. साल 2025-26 के दौरान देश से नारियल और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात 62 प्रतिशत बढ़ गया. इससे कुल निर्यात का मूल्य बढ़कर 7,038.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
कच्चे नारियल से ज्यादा तैयार उत्पादों की मांग
भारत से विदेश भेजे जाने वाले नारियल उत्पादों में सिर्फ कच्चा नारियल ही शामिल नहीं है. नारियल से बने कई दूसरे प्रोडक्ट की भी विदेशों में मांग बढ़ रही है. इनमें नारियल का दूध, मिल्क पाउडर, वर्जिन नारियल तेल और नारियल से बने दूसरे प्रोसेस्ड प्रोडक्ट शामिल हैं. दुनिया में खान-पान की आदतों में बदलाव भी इन उत्पादों की मांग बढ़ाने की एक बड़ी वजह बना है. खासकर पौधों से मिलने वाले भोजन और शाकाहारी खान-पान को बढ़ावा मिलने से नारियल से बने विकल्पों की मांग बढ़ी है.
सक्रिय कार्बन बना सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद
नारियल से जुड़े निर्यात में सक्रिय कार्बन का हिस्सा सबसे ज्यादा है. नारियल जटा को छोड़कर बाकी नारियल उत्पादों के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत रही. साल 2025-26 में सक्रिय कार्बन का निर्यात करीब 4,688.89 करोड़ रुपये का रहा और इसकी मात्रा लगभग 1.8 लाख टन थी. सक्रिय कार्बन की विदेशों में कई क्षेत्रों में मांग है. इसका इस्तेमाल सोने के खनन, पानी और हवा की सफाई, दवा बनाने, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और ऊर्जा से जुड़े कामों में किया जाता है. हानिकारक रसायनों को हटाने में भी यह काफी उपयोगी माना जाता है.
प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों और कारोबार को फायदा
नारियल उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे देश में बढ़ती प्रोसेसिंग क्षमता भी अहम मानी जा रही है. अब नारियल को सिर्फ कच्चे रूप में बेचने के बजाय उससे कई तरह के तैयार उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इससे उत्पाद की कीमत बढ़ती है और किसानों तथा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलते हैं. इसके अलावा, अलग-अलग देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों से भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजार तक पहुंच आसान हुई है. इसका फायदा नारियल कारोबार को भी मिला है.
155 से ज्यादा देशों तक पहुंचा भारतीय नारियल
भारतीय नारियल उत्पादों का बाजार अब सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, भारत के नारियल उत्पाद 155 से ज्यादा देशों में पहुंच रहे हैं. अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, जर्मनी, रूस, तुर्की, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय नारियल उत्पादों के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं. उत्पादों की क्वालिटी बनाए रखने के लिए संबंधित संस्थाएं भी लगातार काम कर रही हैं.
2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस
नारियल क्षेत्र की इस बढ़ती पहचान के बीच 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस 2026 मनाया जाएगा. इस मौके पर तिरुवनंतपुरम में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें नारियल क्षेत्र से जुड़े लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिए जाएंगे. इस साल कार्यक्रम का विषय अनिश्चित समय में नारियल को खाने, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा के साधन के रूप में आगे बढ़ाने पर रखा गया है. बढ़ता निर्यात बताता है कि नारियल अब सिर्फ घरेलू इस्तेमाल की चीज नहीं रहा, बल्कि भारत के लिए विदेशी कमाई का एक अहम जरिया भी बनता जा रहा है.