अप्रैल में ये गलती कर दी तो फसल हो जाएगी बर्बाद! कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

April Farming Tips: अप्रैल का महीना किसानों के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि इस समय गरमा धान और सब्जियों की फसल तेजी से बढ़ती है और उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है. बढ़ती गर्मी के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो जाती है, जिससे फसल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. ऐसे में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवार नियंत्रण करना जरूरी है, ताकि फसल को पर्याप्त पोषण मिल सके. इसके साथ ही, संतुलित और नियमित सिंचाई करना बेहद जरूरी है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 4 Apr, 2026 | 02:50 PM

Tips For Farmers: बदलते मौसम के साथ खेती के कामों में भी बदलाव जरूरी हो जाता है. अप्रैल का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय खरीफ फसलों की तैयारी शुरू हो जाती है. बिहार सरकार के कृषि विभाग ने किसानों के लिए अप्रैल माह में किए जाने वाले जरूरी कृषि कार्यों को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि उत्पादन बेहतर हो और फसल को किसी तरह का नुकसान न हो.

गरमा धान और सब्जियों की देखभाल कैसे करें?

अप्रैल के महीने में गरमा धान और सब्जियों की फसलों पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस समय तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और इसका सीधा असर फसलों की वृद्धि पर पड़ता है. ऐसे में किसानों को खेतों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए, ताकि खरपतवार को नियंत्रित किया जा सके और फसल को मिलने वाले पोषक तत्वों में कोई कमी न आए. इसके अलावा, बढ़ती गर्मी के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो जाती है, इसलिए आवश्यकता अनुसार नियमित और संतुलित सिंचाई करना भी बहुत जरूरी है.

सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन का सही तरीका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय फसलों में संतुलित सिंचाई के साथ उर्वरकों का सही उपयोग करना चाहिए. गरमा धान के लिए यूरिया का टॉप ड्रेसिंग (उपरी छिड़काव) करने की सलाह दी गई है, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है. हालांकि, उर्वरकों का उपयोग संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि फसल पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

धान की नर्सरी (बिचड़ा) की तैयारी

गरमा धान की खेती में बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करना एक अहम चरण होता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलोग्राम कार्बोफ्यूरान 3G का उपयोग करें, जिससे कीटों से सुरक्षा मिलती है. इसके बाद लगभग एक सप्ताह के भीतर रोपाई की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए.

धान की नर्सरी में पानी का स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बिचड़ा स्थल में 3 से 4 सेंटीमीटर तक पानी लगातार बना रहना चाहिए. इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त नमी मिलती है और उनका विकास तेजी से होता है.

किन बातों का रखें खास ध्यान?

अप्रैल की बढ़ती गर्मी में किसानों को अपनी फसल पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए. समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक उपयोग से ही बेहतर उत्पादन संभव है. इसके अलावा, कीट और रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर निरीक्षण करना भी जरूरी है. अप्रैल माह में किए गए सही कृषि कार्य पूरे सीजन की सफलता तय करते हैं. अगर किसान इन सुझावों का पालन करते हैं, तो वे न केवल अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं.

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Published: 4 Apr, 2026 | 02:50 PM
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