जब खेतों में खड़ी सुनहरी फसल हवा में लहराती है, और किसान की आँखें आसमान की ओर टिकी होती हैं… तभी एक ऐसा दिन आता है जो सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि एक गहरी परंपरा का रहस्य अपने भीतर समेटे होता है.
आख़िर क्यों किसान कटाई से पहले भगवान सूर्य को प्रणाम करता है और क्यों एक पूरा पर्व प्रकृति और आस्था के बीच एक अदृश्य सेतु बन जाता है? यही है बैसाखी-जहां हर दाना, एक कहानी कहता है…और किसानों से जुड़े इस पावन पर्व की परंपरा के बारें में बता रहे है बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य डॉ शेष नारायण वाजपेयी..
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