र्नाटक के आमों की विदेश में धूम! पहली बार मालदीव पहुंची खेप, किसानों की बढ़ेगी कमाई

कर्नाटक से पहली बार नीलम और तोतापुरी किस्म के आम हवाई मार्ग से मालदीव भेजे गए हैं. APEDA की इस पहल से किसानों को नए विदेशी बाजार मिले हैं. एक टन आम की पहली खेप कोलार जिले से भेजी गई. FPC से जुड़े किसानों को पारंपरिक बिक्री की तुलना में 50 फीसदी से अधिक दाम मिले, जिससे उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.

नोएडा | Updated On: 3 Aug, 2026 | 06:04 PM

Karnataka News: कर्नाटक के आम उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है. पहली बार राज्य से नीलम और तोतापुरी किस्म के आम हवाई मार्ग से मालदीव भेजे गए हैं. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की पहल से हुए इस निर्यात से किसानों को नए विदेशी बाजार मिलेंगे और आम की इन किस्मों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा. 30 जुलाई को भेजी गई इस खेप के साथ कर्नाटक के देर से पकने वाले आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. इससे राज्य के आम उत्पादकों को नए विदेशी बाजार मिलने और निर्यात बढ़ने की उम्मीद है.

मालदीव भेजी गई इस पहली खेप में एक टन नीलम और तोतापुरी आम शामिल थे. ये आम कर्नाटक के कोलार जिले के केजीएफ तालुक के किसानों से खरीदे गए थे. APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस खेप को रवाना करते हुए द न्यू  इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि इससे भारतीय आमों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेंगे. साथ ही, देर से तैयार होने वाली आम की किस्मों के निर्यात  को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में निर्यातकों, किसान उत्पादक कंपनियों (FPC), किसानों और अन्य संबंधित पक्षों की सराहना की.

नीलम आम की क्या है खासियत

नीलम आम अपने मीठे स्वाद, रसदार गूदे और खुशबू के लिए जाना जाता है. इसका इस्तेमाल मिठाइयों, स्मूदी और पेय पदार्थों में किया जाता है. वहीं, तोतापुरी आम अपने अलग आकार और खट्टे-मीठे स्वाद के कारण ताजा खाने के साथ-साथ प्रोसेसिंग उद्योग  में भी काफी पसंद किया जाता है. ये दोनों किस्में जून के आखिर से जुलाई के अंत तक तैयार होती हैं. इससे भारत के आम निर्यात का सीजन लंबा होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में देर तक मांग पूरी करने में मदद मिलती है.

पारंपरिक मंडी व्यवस्था की तुलना में 50 फीसदी से अधिक दाम मिले

APEDA के अनुसार, यह निर्यात कर्नाटक की बागवानी फसलों की बढ़ती निर्यात क्षमता को दिखाता है. साथ ही, किसान उत्पादक कंपनियों  (FPC) की मदद से किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का भी अच्छा उदाहरण है. इस पहल के तहत FPC से जुड़े किसानों को पारंपरिक मंडी व्यवस्था की तुलना में 50 फीसदी से अधिक दाम मिले. इससे यह साबित हुआ कि सीधे खरीद और निर्यात से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है. APEDA ने कहा कि वह आगे भी राज्य सरकारों, निर्यातकों और किसान संगठनों के साथ मिलकर निर्यात ढांचे को मजबूत करेगा. साथ ही, भारतीय बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और किसानों के लिए स्थायी निर्यात अवसर बढ़ाने पर काम जारी रहेगा.

Published: 3 Aug, 2026 | 08:00 PM

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