Indian Mango Export: भारत के आम की मांग दुनिया के कई देशों में लगातार बढ़ रही है. लेकिन निर्यात के दौरान फल मक्खी (Fruit Fly) और एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose) जैसी बीमारियां आम की क्वालिटी को नुकसान पहुंचाती हैं. इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIHR), बेंगलुरु ने आम के लिए एक नई पोस्ट-हार्वेस्ट (तोड़ाई के बाद) तकनीक विकसित की है. इस नई तकनीक की मदद से अब एक ही प्रक्रिया में फल मक्खी और एन्थ्रेक्नोज दोनों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा. इससे किसानों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं तीनों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
पहले करनी पड़ती थीं दो अलग-अलग प्रक्रियाएं
अब तक आम में फल मक्खी और एन्थ्रेक्नोज से बचाव के लिए दो अलग-अलग गर्म पानी (हॉट वॉटर) उपचार करने पड़ते थे. फल मक्खी को नियंत्रित करने के लिए आम को 48 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 60 मिनट तक गर्म पानी में रखा जाता था, जबकि एन्थ्रेक्नोज से बचाव के लिए 52 डिग्री सेल्सियस पर 5 से 10 मिनट तक अलग उपचार करना पड़ता था. इस प्रक्रिया में समय भी ज्यादा लगता था और लागत भी बढ़ जाती थी. सबसे बड़ी समस्या यह थी कि, अल्फांसो जैसी कुछ किस्मों में लंबे समय तक गर्म पानी में रखने से फल के अंदर स्पंजी टिश्यू (Spongy Tissue) बनने की समस्या देखी गई.
एक साथ होगा दोनों समस्याओं का समाधान
आईसीएआर-IIHR के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान खोजते हुए नई तकनीक विकसित की है. इसके तहत कच्चे लेकिन पूरी तरह विकसित आमों को 55 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गर्म पानी में 20 मिनट तक रखा जाता है. इसके बाद फलों को 5 प्रतिशत नमक वाले पानी में 30 मिनट तक डुबोया जाता है. संस्थान के अनुसार, इस नई प्रक्रिया से फल के अंदर किसी तरह की खराबी नहीं होती. साथ ही यह फल मक्खी और एन्थ्रेक्नोज दोनों पर प्रभावी नियंत्रण करती है. यानी अब दो अलग-अलग उपचार की जरूरत नहीं पड़ेगी.
कई प्रमुख किस्मों पर सफल रहा परीक्षण
इस नई तकनीक का परीक्षण कई व्यावसायिक आम की किस्मों पर किया गया. इनमें अल्फांसो, बंगनपल्ली, अर्का उदय और अर्का सुप्रभात जैसी किस्में शामिल हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, सभी परीक्षण सफल रहे और नई तकनीक ने बेहतर परिणाम दिए. खासकर अल्फांसो आम में पहले आने वाली स्पंजी टिश्यू की समस्या इस प्रक्रिया में नहीं देखी गई.
निर्यातकों और किसानों को होगा बड़ा फायदा
अगर इस तकनीक को पौधा संरक्षण, संगरोध एवं भंडारण निदेशालय (DPPQ&S) से मंजूरी मिल जाती है, तो आम के निर्यात में लगने वाला क्वारंटीन हॉट वॉटर ट्रीटमेंट का समय करीब एक-तिहाई तक कम हो जाएगा. इससे निर्यात की प्रक्रिया तेज होगी, लागत घटेगी और आम की क्वालिटी भी बेहतर बनी रहेगी. जिन देशों में क्वारंटीन नियम लागू नहीं हैं या जहां दूर-दराज के घरेलू बाजारों में आम भेजे जाते हैं, वहां इस तकनीक का इस्तेमाल अभी से किया जा सकता है.
ब्रुनेई भेजी गई पहली खेप रही सफल
नई तकनीक की सफलता का उदाहरण भी सामने आ चुका है. 25 जून 2026 को ICAR-IIHR ने बेंगलुरु की निर्यातक हसीना रोशन (Millet Smile, येलहंका) को इस तकनीक के जरिए 1.2 टन बंगनपल्ली आम ब्रुनेई भेजने में मदद की.
चेन्नई हवाई अड्डे से भेजी गई इस खेप के खरीदार ने पुष्टि की कि, आम अच्छी स्थिति में पहुंचे. फलों में न तो फल मक्खी का असर था और न ही एन्थ्रेक्नोज की समस्या. साथ ही आम की क्वालिटी और रंग-रूप भी संतोषजनक पाया गया.
भारतीय आमों को मिलेगा नया भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि, यह नई तकनीक आम के बाद होने वाले नुकसान को कम करेगी और निर्यातकों को बेहतर बाजार दिलाने में मदद करेगी. इससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी, निर्यातकों की लागत घटेगी और विदेशी बाजारों में भारतीय आम की साख और मजबूत होगी. आने वाले समय में यह तकनीक भारत के आम निर्यात को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.