Tip Of The Day: फूलगोभी की पौध पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना फंगस से बर्बाद होगी फसल

Cauliflower Farming: फूलगोभी की 15 दिन की पौध सबसे नाजुक अवस्था में होती है. इस समय जलभराव और फंगस से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. संतुलित सिंचाई, पौष्टिक खाद, खरपतवार नियंत्रण और नर्सरी की सही देखभाल से पौध 20-25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 26 Jul, 2026 | 06:00 AM

Cauliflower Nursery Management: अगर आपने फूलगोभी की नर्सरी तैयार कर ली है और पौध करीब 15 दिन की हो चुकी है, तो अब उसकी सही देखभाल का सबसे अहम समय है. खासकर मॉनसून के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी पूरी नर्सरी को खराब कर सकती है. इस समय पौध पर फंगस, तना गलने और जलभराव का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद के अनुसार, अगर किसान इस अवस्था में सही तरीके से खाद, सिंचाई और रोग प्रबंधन करें, तो पौध 20 से 25 दिनों में आसानी से खेत में लगाने लायक तैयार हो सकती है. 15 दिन की पौध सबसे नाजुक अवस्था में होती है. इसलिए इस समय पौध की नियमित निगरानी और सही देखभाल बेहद जरूरी है.

15 दिन की पौध पर सबसे ज्यादा रहता है फंगस का खतरा

मॉनसून में अधिक नमी के कारण फूलगोभी की नर्सरी में ‘डैम्पिंग ऑफ’ यानी तना गलने की बीमारी तेजी से फैलती है. इस बीमारी में पौधे का तना कमजोर होकर गल जाता है और पौधा गिर जाता है.

इससे बचाव के लिए नर्सरी में कभी भी पानी जमा न होने दें. जरूरत पड़ने पर ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक उत्पाद या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयुक्त फंगीसाइड का इस्तेमाल किया जा सकता है. समय रहते रोकथाम करने से पूरी नर्सरी को सुरक्षित रखा जा सकता है.

पौध की तेज बढ़वार के लिए अपनाएं ये तरीके

अगर पौध को जल्दी तैयार करना है, तो नर्सरी की मिट्टी भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए. मिट्टी तैयार करते समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाना फायदेमंद रहता है. इसके अलावा प्रो-ट्रे या कोकोपीट में पौध तैयार करने से जड़ों का विकास बेहतर होता है. पौध की बढ़वार के लिए शुरुआती दिनों के बाद हल्का संतुलित पोषण देने से पौधे मजबूत बनते हैं. जब पौध में 4 से 5 असली पत्तियां निकल आएं, तब वह खेत में रोपाई के लिए तैयार मानी जाती है.

सिंचाई करते समय न करें यह गलती

15 दिन की पौध को ज्यादा पानी की नहीं, बल्कि संतुलित नमी की जरूरत होती है. सीधे पाइप से तेज पानी देने की बजाय झारे या फव्वारे से हल्की सिंचाई करें, ताकि नाजुक पौधे टूटें नहीं. सुबह की हल्की धूप पौध के लिए अच्छी होती है, लेकिन दोपहर की तेज धूप और लगातार बारिश से बचाने के लिए नर्सरी पर एग्री नेट या पॉलीथीन का शेड लगाना बेहतर रहता है. साथ ही क्यारियों से खरपतवार समय-समय पर निकालते रहें.

जलभराव से बचाना है सबसे जरूरी

मॉनसून के मौसम में नर्सरी के लिए सबसे बड़ा खतरा पानी भरना होता है. इसलिए नर्सरी की क्यारियां जमीन से करीब 6 इंच ऊंची बनानी चाहिए, ताकि ज्यादा पानी आसानी से बाहर निकल सके. अगर पानी लंबे समय तक रुका रहे, तो फंगस लगने और जड़ सड़ने की समस्या तेजी से बढ़ जाती है. अगर किसी पौधे में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, जैसे पत्तियों का पीला पड़ना, मुरझाना या तना सड़ना, तो उस पौधे को तुरंत बाकी पौधों से अलग कर दें. इसके बाद कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही दवा या उपचार करें, ताकि बीमारी दूसरे पौधों में न फैले.

रोपाई से पहले करें हार्डनिंग

फूलगोभी की पौध आमतौर पर 20 से 25 दिनों में खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है. रोपाई से पहले यह जरूर देख लें कि पौधे में 4-5 असली पत्तियां आ चुकी हों और उसकी ऊंचाई लगभग 4-5 इंच हो. खेत में लगाने से 2-3 दिन पहले नर्सरी में पानी कम कर दें. इस प्रक्रिया को हार्डनिंग कहा जाता है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और मुख्य खेत में लगाने के बाद जल्दी वातावरण के अनुसार ढल जाते हैं.

सही देखभाल से मिलेगा बेहतर उत्पादन

फूलगोभी की अच्छी फसल की शुरुआत मजबूत पौध से होती है. अगर किसान 15 से 25 दिन के बीच पौध की सही देखभाल, संतुलित सिंचाई, जल निकासी और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें, तो रोपाई के बाद फसल तेजी से बढ़ती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

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Published: 26 Jul, 2026 | 06:00 AM

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