Cauliflower Farming: सफेद फूलगोभी हो रही है हरी-भूरी? ये गलती आपकी फसल कर रही है बर्बाद!
Phool Gobhi Ki Kheti: क्या आपकी फूलगोभी भी सफेद की जगह हरी या जंग जैसी भूरी हो रही है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए! यह सिर्फ रंग बदलने की समस्या नहीं, बल्कि आपकी मेहनत और मुनाफे पर सीधा असर डालने वाली बीमारी है. सही समय पर मिट्टी की जांच, पोषक तत्वों का संतुलन और थोड़ी सी जागरूकता से आप इस नुकसान को रोक सकते हैं और अपनी फसल को बाजार में बेहतर दाम दिला सकते हैं.

फूलगोभी के सफेद फूलों का हरा या जंग जैसा भूरा हो जाना ‘ब्राउनिंग डिजीज’ कहलाता है. यह समस्या मुख्य रूप से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और ज्यादा धूप के कारण होती है, जिससे फसल की क्वालिटी और बाजार भाव दोनों प्रभावित होते हैं.

जब गोभी का फूल लंबे समय तक सीधे सूर्य प्रकाश में रहता है, तो उसका प्राकृतिक सफेद रंग बदलकर हल्का हरा हो जाता है. इसलिए फूल को पत्तों से ढककर रखना या समय पर देखभाल करना जरूरी है.

हाई pH (7.5 से ज्यादा) या ऊसर मिट्टी में फूलों पर भूरे धब्बे आने की संभावना बढ़ जाती है. बेहतर उत्पादन के लिए 6.5 से 7.5 pH वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

मिट्टी में बोरॉन तत्व की कमी होने पर फूलों पर जंग जैसे धब्बे उभर आते हैं. यह सूक्ष्म पोषक तत्व फूलों के सही आकार और रंग को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.

खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराना बहुत जरूरी है. सही उर्वरकों और पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग न केवल ब्राउनिंग रोकता है, बल्कि फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 20 किलोग्राम बोरेक्स मिट्टी में मिलाया जा सकता है. यदि पहले प्रयोग न हुआ हो तो कर्ड बनने से पहले 0.1 प्रतिशत-0.2 प्रतिशत बोरेक्स घोल का छिड़काव करना प्रभावी उपाय है.