लद्दाख में रासायनिक खाद पर पूरी तरह रोक, अब सिर्फ जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

Ladakh Organic Farming: लद्दाख प्रशासन ने रासायनिक और सिंथेटिक उर्वरकों की खरीद, बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. नियम तोड़ने पर कम से कम 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. प्रशासन ने किसानों से केवल जैविक इनपुट अपनाने की अपील की है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 19 Jul, 2026 | 08:58 AM

Ladakh Fertilizer Ban: लद्दाख प्रशासन ने खेती को पूरी तरह जैविक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अब केंद्र शासित प्रदेश में रासायनिक खाद और सिंथेटिक उर्वरकों (खाद) की खरीद, बिक्री, वितरण, मार्केटिंग और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. इस फैसले का मकसद मिट्टी, पानी और पर्यावरण को सुरक्षित रखना और किसानों को टिकाऊ खेती की ओर बढ़ाना है. प्रशासन का मानना है कि इससे लद्दाख की पारंपरिक खेती को नई मजबूती मिलेगी और भविष्य में यह क्षेत्र पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती का मॉडल बन सकेगा.

अब रासायनिक खाद के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक

लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश के बाद अब खेती में किसी भी तरह की रासायनिक और सिंथेटिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. यह रोक सिर्फ खेतों में खाद डालने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन खादों की खरीद, बिक्री, वितरण और प्रचार-प्रसार पर भी लागू होगी. प्रशासन ने साफ कहा है कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ऐसे लोगों पर कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.

किसानों से जैविक इनपुट अपनाने की अपील

प्रशासन ने किसानों, किसान समूहों और खेती से जुड़े सभी लोगों से अपील की है कि वे अब सिर्फ जैविक खाद और जैविक उत्पादों का ही इस्तेमाल करें. इसमें खेत में तैयार की गई गोबर की खाद, कंपोस्ट और बाहर से मिलने वाले प्रमाणित जैविक उत्पाद शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि जैविक खेती अपनाने से मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी, पानी के स्रोत साफ और सुरक्षित रहेंगे और खेती भी पर्यावरण के अनुकूल होगी. इससे आने वाले समय में किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों को फायदा मिलेगा.

ऑर्गेनिक लद्दाख बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लद्दाख प्रशासन ने इस फैसले को पूरे क्षेत्र को ऑर्गेनिक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की दिशा में अहम पहल बताया है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अनुसार, लद्दाख का स्वच्छ वातावरण, समृद्ध जैव विविधता और पारंपरिक खेती की पद्धतियां इसे जैविक खेती के लिए सबसे उपयुक्त बनाती हैं. प्रशासन का मानना है कि रासायनिक खाद पर रोक लगाने से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा और खेती जलवायु परिवर्तन के असर को बेहतर तरीके से झेल सकेगी.

प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ा फैसला

प्रशासन ने बताया कि, यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक खेती, मिट्टी की सेहत सुधारने, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है. हाल ही में नीति आयोग की बैठक में भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की गई थी. इसी दिशा में लद्दाख ने अब एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है.

कृषि विभाग संभालेगा पूरी जिम्मेदारी

इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कृषि विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है. इसके साथ ही बागवानी, सहकारिता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग भी किसानों को इस बदलाव के लिए तैयार करेंगे. इन विभागों की जिम्मेदारी होगी कि किसानों को जागरूक किया जाए, प्रशिक्षण दिया जाए और जैविक खेती के लिए जरूरी संसाधन आसानी से उपलब्ध कराए जाएं.

किसानों और पर्यावरण दोनों को होगा फायदा

अगर इस योजना को ठीक से लागू किया गया, तो लद्दाख की खेती लंबे समय तक बेहतर और सुरक्षित बनी रह सकती है. इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी, पानी के स्रोत सुरक्षित रहेंगे और रासायनिक प्रदूषण भी कम होगा. साथ ही जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी फसल का अच्छा दाम मिलने और नए बाजार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. यही वजह है कि इस फैसले को लद्दाख की खेती और पर्यावरण के लिए एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है.

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