Farmers Suicide: हर दिन दो किसान दे रहे जान! बीते 6 महीने में 880 किसानों ने आत्महत्या की

farmers suicide cases : महाराष्ट्र के अमरावती और मराठवाड़ा रीजन में बीते 6 महीने में किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है. अभी तक बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों को सहायता राशि भी जारी नहीं की गई है.

Kisan India
नोएडा | Published: 19 Jul, 2026 | 12:04 PM

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. ताजा रिपोर्ट में दर्ज आत्महत्या के मामले दर्शाते हैं कि किसानों की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है. सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से जून तक 6 महीने के दौरान मराठवाड़ा और अमरावती में 880 किसानों ने अपना जीवन खत्म कर लिया. जून 82 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान दी, जो हर दिन दो मौतों की संख्या से भी ज्यादा है. वहीं, दोनों रीजन के कुल 359 मृतक परिवारों को ही सरकार ने सहायता राशि देने के लिए योग्य माना है.

महाराष्ट्र के अमरावती संभाग में इस साल जनवरी से जून के बीच कुल 415 किसानों ने आत्महत्या की. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अमरावती संभाग के आयुक्तालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि आत्महत्याओं की सबसे अधिक संख्या जून में दर्ज की गई जब एक महीने में कुल 82 किसानों ने अपनी जान दी.

हर महीने 62 से ज्यादा किसानों की मौत

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अमरावती संभाग में जनवरी में 62, फरवरी में 64, मार्च में 68, अप्रैल में 76, मई में 63 और जून में 82 किसानों ने आत्महत्या की. जनवरी से जून की अवधि में यवतमाल में सबसे अधिक 128 किसानों ने जान दी. इसके बाद अकोला में 80, अमरावती में 76, बुलढाणा में 69 और वाशिम में 62 किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.

केवल 359 परिवार मुआवजे के लिए योग्य

अमरावती संभाग के जिलों में आत्महत्या के 144 मामलों को मुआवजे के लिए पात्र माना गया है, जबकि 88 योग्य नहीं हैं और 183 मामलों की जांच चल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक 27 मामलों में संबंधित परिवार को मदद दी गई है. वहीं, मराठवाड़ा संभाग के जिलों में आत्महत्या के 215 मामलों को सरकार से आर्थिक मदद के लिए योग्य पाया गया, जबकि 26 मामलों को मुआवजे के लिए अयोग्य पाया गया. फिलहाल 222 मामलों की जांच चल रही है और अब तक 108 मामलों में आर्थिक मदद दी जा चुकी है.

मराठवाड़ा इलाके में 465 किसानों ने आत्महत्या की

छत्रपति संभाजीनगर स्थित डिविजनल कमिश्नर कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा साल में जनवरी से जून के बीच मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के 465 मामले दर्ज किए गए. पीटीआई के अनुसार सरकारी रिपोर्ट में बुधवार को बताया गया कि मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में जनवरी से जून 2026 के बीच 465 किसानों ने आत्महत्या की.

सबसे ज्यादा 109 आत्महत्या के मामले संभाजीनगर में

सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा 109 आत्महत्या के मामले छत्रपति संभाजीनगर जिले से सामने आए हैं. जबकि सबसे कम मामले लातूर जिले (26) में सामने आए. रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जनवरी से जून के बीच जिलेवार किसानों की आत्महत्या के मामलों में बीड में 95 किसानों ने आत्महत्या की. धाराशिव जिले में 65, नांदेड़ जिले में 61, जालना में 40, परभणी में 34 और हिंगोली में 35 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं.

2024 से 2026 तक किसानों की आत्महत्या के मामले भयावह

विधान परिषद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 2024 में किसानों की आत्महत्या के 2,635 मामले दर्ज किए गए. महाराष्ट्र में 2025 के शुरुआती नौ महीनों में 781 किसानों ने आत्महत्या की. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में जनवरी और मई 2026 के बीच अकेले यवतमाल जिले में 102 किसानों ने आत्महत्या की है. जबकि, पूरे राज्य का आंकड़ा अभी जारी होना बाकी है.

किसानों की आत्महत्या की घटनाएं क्यों हो रहीं

महाराष्ट्र के किसान भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. वहीं, कर्ज लेकर खेती करने और फिर विपरीत मौसम से बर्बाद होने पर किसानों को सरकारी मदद समय पर नहीं मिल पाने और बार बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उनकी अनदेखी किए जाने से उनमें निराशा बढ़ती है. विपक्षी नेताओं ने विधासनभा परिसर में कर्जमाफी को लेकर किए प्रदर्शन में कहा था कि राज्य के किसान अभी भी कर्ज, घटती जमीन की जोत और जलवायु संबंधी झटकों के कारण गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं.

विपक्ष ने कहा कि यह दुखद कृषि संकट मुख्य रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में अधिक है, जो बढ़ते कर्ज और फसल खराब होने की वजह से और गहरा गया. सरकार के ढुलमुल रवैये और किसान विरोधी नीतियों के चलते अन्नदाता आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होते हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़