केला और मखाना के परिवहन में आएगी तेजी, किसानों का फल-सब्जी में नुकसान घटेगा, बिक्री बढ़ेगी

मौसमी बाढ़ अक्सर सड़क संपर्क को प्रभावित करती है, जिससे लोगों और सामान की आवाजाही धीमी हो जाती है और स्थानीय किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. फसलें बाढ़ में डूबकर सढ़ जाती हैं तो मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा होता.

Kisan India
नोएडा | Published: 19 Jul, 2026 | 06:40 PM

केंद्र सरकार ने बिहार के कृषि जोन से गुजरने वाले एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन में अपग्रेड करने को मंजूरी दे दी है. इसे बिहार के केला और मखाना किसानों के लिए बड़ी पहल बताया जा रहा है. राजमार्ग के फोरलेन होने से केला और मखाना का परिवहन तेज होगा, जिससे केला के खेत में ही या किसान के पास खराब होने का संकट खत्म होगा. वहीं, मखाना के परिवहन में तेजी से बिक्री में उछाल होगा, जो किसानों को ज्यादा कीमत दिलाने में मददगार होगा. वहीं, किसानों को उपज स्टोर करके रखने और उस पर होने वाले खर्च से मुक्ति मिलेगी.

बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को 3936.05 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन के मानक तक उन्नत करना उन लोगों में एक निवेश है जिनकी आजीविका बिहार के केले और मखाने को कुशलतापूर्वक बाजार तक पहुंचाने पर निर्भर करती है. इससे राज्य के कृषि प्रधान क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने में मदद मिलेगी. एक ऐसे क्षेत्र में जहां कुछ घंटों का अंतर कृषि उपज की गुणवत्ता और मूल्य में अंतर ला सकता है, राजमार्गों का उन्नयन एक परिवहन परियोजना से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित होने वाला है.

केला लदे ट्रक जाम में नहीं फंसेंगे

बिहार के उपजाऊ मैदानों पर सुबह होने से पहले ही खगड़िया के खेतों से केले के गुच्छों से लदे ट्रक निकल पड़ते हैं. वहीं, मखाने की बोरियां देश के सबसे बड़े मखाना केंद्रों में से एक पूर्णिया के तालाबों और प्रसंस्करण केंद्रों से अपनी यात्रा शुरू कर देती हैं. वर्षों से यातायात जाम और मौसमी रुकावटों के कारण इन बहुमूल्य फसलों की यात्रा अक्सर धीमी रही है. केले जैसी जल्दी खराब होने वाली फसल के लिए जहां हर घंटा महत्‍व रखता है, तेज और अधिक विश्वसनीय संपर्क से नुकसान को कम करने, गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों के लिए बाजार में उच्‍चतम मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.

बाढ़ रोधी ढांचे से किसानों का नुकसान घटेगा

पूर्वी बिहार का परिवहन तंत्र ऐतिहासिक रूप से बाढ़ के प्रति संवेदनशील रहा है, विशेषकर कोसी और गंगा नदी प्रणालियों से प्रभावित क्षेत्रों में. मौसमी बाढ़ अक्सर सड़क संपर्क को प्रभावित करती है, जिससे लोगों और सामान की आवाजाही धीमी हो जाती है और स्थानीय किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. फसलें बाढ़ में डूबकर सढ़ जाती हैं तो मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा होता और लोगों के घर-मकान ढहने का खतरा रहता है. खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन बनाने में बाढ़ रोधी इंजीनियरिंग उपाय शामिल किए जाएंगे, जिससे कटान रुकेगा.

पश्चिम बंगाल और झारखंड के बाजारों तक पहुंचे फल सब्जी

सीमांचल क्षेत्र लंबे समय से सीमित कनेक्टिविटी से जुड़ी विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है. वर्तमान में जिन यात्राओं में लगभग 3.5 से 4 घंटे लगते हैं, कॉरिडोर के चालू होने के बाद वे लगभग 1.5 घंटे में पूरी हो जाएंगी. उन्नत राजमार्ग बिहार और पड़ोसी पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करेगा, साथ ही व्यापक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के माध्यम से झारखंड तक पहुंच में सुधार करेगा. इससे स्थानीय कृषि उत्पाद, फल, सब्जियां इन राज्यों के शहरों में तेजी से सप्लाई किए जा सकेंगे.

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