केरल में मॉनसून के दौरान लंबे समय तक बारिश नहीं हुई, लेकिन जुलाई के दूसरे हिस्से में हुई तेज बारिश से कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. मौसम के इस उतार-चढ़ाव के साथ किसानों को खाद की बढ़ती कीमतों की भी चिंता रही. इसके बावजूद सब्जी किसानों ने इन मुश्किलों का सामना किया है. ओणम के सीजन में राज्य के कई हिस्सों में किसानों को सब्जियों के अच्छे दाम मिल रहे हैं. कृषि विभाग का कहना है कि इस बार सब्जियों के उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है.
पालक्काड, अलप्पुझा, इडुक्की, तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर के किसानों के मुताबिक, सब्जियों के भाव स्थिर हैं और उत्पादन भी संतोषजनक है. कुट्टनाड इलाके में बारिश और बाढ़ से खेती प्रभावित हुई, लेकिन इसके बावजूद इस बार यहां कृषि उत्पादन बढ़ा है. केरल के अलप्पुझा जिले में 12 सब्जी बाजारों में से कुछ बाजार बारिश के कारण प्रभावित हुए हैं. इसके बावजूद किसानों ने करीब 15 तरह की सब्जियों की खेती की है, जिनकी ओणम बाजार में आवक शुरू हो गई है. वेजिटेबल एंड फ्रूट प्रमोशन काउंसिल केरलम (VFPCK) की अलप्पुझा जिला प्रबंधक एस. सिंधु ने यह जानकारी दी.
करेला-चिचिंडा-बरबट्टी के अच्छे भाव से किसान खुश,
जिले में वेन्मनी, थझक्करा, नूरनाड, चेरियानाड, कडक्कारापल्ली और कांजिकुझी प्रमुख सब्जी उत्पादक क्षेत्र हैं. सिंधु के मुताबिक, पिछले साल किसानों ने करीब 9 करोड़ रुपये की सब्जियां बेची थीं, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 15 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, पालक्काड के किसान भी सब्जियों के अच्छे भाव से खुश हैं. यहां करेला, चिचिंडा और बरबट्टी की खरीद कीमत अच्छी बनी हुई है. VFPCK की पालक्काड जिला प्रबंधक बिंदुमोल मैथ्यू के मुताबिक, पिछले साल करीब 15 करोड़ रुपये की सब्जियां बिकी थीं और इस साल 20 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है.
बारिश से नेन्द्रन केले की फसल को नुकसान
केरल के त्रिशूर और पालक्काड में नेन्द्रन केले की खेती करने वाले किसानों को बारिश के कारण नुकसान हुआ है. हालांकि, बाजार में केले की कमी होने से इसकी कीमतों में तेजी आई है. वहीं, कंथल्लूर और वट्टावडा में ठंड के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों की खेती भी प्रभावित हुई है. जुलाई में केरल के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई, लेकिन इन दोनों इलाकों में बारिश नहीं हुई. इससे सब्जियों का उत्पादन काफी घट गया.
जंगली जानवरों से खेती को नुकसान
हॉर्टिकॉर्प आमतौर पर वट्टावडा और कंथल्लूर से पत्तागोभी, फूलगोभी, गाजर और आलू जैसी सब्जियां खरीदता है. इस बार यहां से खरीद नहीं हुई, जबकि देविकुलम से करीब 80 टन सब्जियां खरीदी गई हैं. स्थानीय किसान पी.एन. सुकुमारन के मुताबिक, इलाके में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक के कारण भी सब्जियों की खेती कम हुई है. हाथी, जंगली सूअर, हिरण और गौर अक्सर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने बताया कि कुछ किसान लहसुन की खेती करते हैं, क्योंकि जंगली जानवर इसे नहीं खाते. वहीं, भुगतान में देरी के कारण छोटे किसान हॉर्टिकॉर्प को सब्जियां देने से भी पीछे हट रहे हैं.