CM नायडू का ऐलान, आंध्र प्रदेश में बनेगा एक्वा कॉरिडोर.. इन जिलों के किसानों को होगा फायदा

आंध्र प्रदेश सरकार ने मत्स्य और झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए एक्वा कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि इससे सीफूड प्रोसेसिंग, निर्यात और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. राज्य पहले से ही देश के मछली और झींगा उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 6 Jun, 2026 | 12:57 PM

Andhra Pradesh Aqua Corridor: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में एक्वाकल्चर (मत्स्य और झींगा पालन) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े एक्वा कॉरिडोर के विकास की घोषणा की है. यह कॉरिडोर अमरावती, भीमावरम, काकीनाडा, विशाखापत्तनम, कृष्णापट्टनम और नेल्लोर को आपस में जोड़ेगा. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश समुद्री उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सरकार का लक्ष्य किसानों और उद्यमियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर इस क्षेत्र को और मजबूत बनाना है.

दरअसल, विशाखापत्तनम में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ये घोषणा की. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक्वाकल्चर क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी. इसके तहत बेहतर बुनियादी ढांचा, आधुनिक तकनीक, शोध, नवाचार और वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि प्रस्तावित एक्वा कॉरिडोर आंध्र प्रदेश में एक्वाकल्चर क्षेत्र के विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा. इसके तहत शोध संस्थान, स्टार्टअप, नवाचार केंद्र और आधुनिक प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे समुद्री उत्पाद उद्योग  को नई गति मिलेगी. उन्होंने ‘आंध्र श्रिम्प, इंडिया सीफूड’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की भी घोषणा की और कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री उत्पाद बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना होगा.

ब्लू इकोनॉमी राज्य की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार

नायडू ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) भविष्य की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मत्स्य क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी. उन्होंने ‘पॉन्ड टू पोर्ट’ (तालाब से बंदरगाह तक), ‘फार्मर टू ग्लोबल कंज्यूमर’ (किसान से वैश्विक उपभोक्ता तक) और ‘ब्लू इकोनॉमी टू विकसित भारत’ जैसे विचारों पर काम करने की जरूरत बताई, ताकि मछली और झींगा पालकों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर मिल सकें. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश के पास समुद्री उत्पाद क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार मौजूद है. राज्य की 1,053 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, कई बंदरगाह और हवाई अड्डे समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं.

मछली उत्पादन में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 28 फीसदी

उन्होंने बताया कि देश के कुल मछली उत्पादन में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 28 फीसदी है, जबकि झींगा (श्रिम्प) उत्पादन  में राज्य का योगदान 66 फीसदी है. इसके अलावा, भारत की कुल समुद्री उत्पाद निर्यात आय में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य से हर साल 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जो इसकी मजबूत एक्वाकल्चर और सीफूड इंडस्ट्री को दर्शाता है.

आंध्र प्रदेश सरकार पूरा सहयोग देगी

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार की सभी योजनाओं और पहलों को आंध्र प्रदेश सरकार पूरा सहयोग देगी. उन्होंने समुद्री उत्पाद प्रसंस्करण (सीफूड प्रोसेसिंग) के लिए मेगा प्रोसेसिंग पार्क स्थापित करने की केंद्र की पहल का स्वागत किया और कहा कि अब केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक्वा उत्पादों का केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रोसेस किया जाता है. ऐसे में सीफूड प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात आधारित विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के क्षेत्र में बड़े अवसर मौजूद हैं, जिनका लाभ उठाकर किसानों और उद्योग को अधिक फायदा पहुंचाया जा सकता है.

73,000 करोड़ के पार पहुंचा समुद्री उत्पादों का निर्यात

इस दौरान नायडू ने केंद्र सरकार से आंध्र प्रदेश में मत्स्य पालन मंत्रालय  का एक क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर जमीन उपलब्ध करा देगी. इस पर केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि जमीन मिलते ही एक महीने के भीतर क्षेत्रीय कार्यालय की आधारशिला रख दी जाएगी. केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत के मत्स्य क्षेत्र ने तेजी से विकास किया है. देश का मछली उत्पादन बढ़कर 197 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि समुद्री उत्पादों का निर्यात 73,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है.

 

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